उत्तराखंड में कमिश्नर की जांच और 11 इंजीनियरों के तबादले के बाद भी असी गंगा और भागीरथी की तटवर्ती आबादी को बचाने के लिए किए जा रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है।
पढ़ें, नहीं मिले भगवान तो दे दी अपनी जान
गंगोरी में भागीरथी के किनारे ग्राउंड लेबिल से नीचे ढाई मीटर गहरी बुनियाद के बजाय बाढ़ के मलबे में ही डेढ़ मीटर खुदाई कर पानी से भरे गड्ढों में कंक्रीटिंग की जा रही है। निम्न गुणवत्ता के इन बाढ़ सुरक्षा कार्यों के टिके रहने पर भी संदेह है।
541 लाख से सुरक्षा दीवार का निर्माण
सिंचाई विभाग की ओर से गंगोरी बस्ती के नीचे 541 लाख लागत से 600 मीटर सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जा रहा है।
पढ़ें, आपदाः पीड़ितों को परेशान कर रही बहुगुणा सरकार
स्थिति का जायजा लेने अमर उजाला के साथ मौके पर पहुंचे गंगोरी के पालिका सभासद हरीश डंगवाल और होटल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र पंवार ने आश्चर्य जताया।
उन्होंने कहा कि पहले भी बाढ़ सुरक्षा कार्यों में ऐसी ही गड़बड़ियां हुई थीं। इस मामले में 11 इंजीनियरों का तबादला भी किया गया फिर दोबारा से वही काम शुरू कर दिया।
पढ़ें, उत्तराखंड के पूर्व सीएम डॉ. निशंक ने पेश की मिसाल
अगस्त 2012 में आई बाढ़ के बाद सरकारी सुस्ती के कारण मार्च 2013 में सिंचाई विभाग ने असी गंगा और भागीरथी के किनारे सुरक्षा दीवार का काम शुरू किया था।
पढ़ें, नए साल के पहले दिन मौत से हुई मुलाकात
तब भी ग्राउंड लेबिल के बजाय बाढ़ के मलबे में ही नींव डालने के कारण जून 2013 में आई आपदा में कुछ दीवारों का तो पता ही नहीं चला और कुछ की बुनियाद हवा में झूलती नजर आई। अब सिंचाई विभाग ने पुराने कार्यों का पुनर्निर्माण बताकर पुन: बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू कर दिए हैं।
ठेकेदार को दिए निर्देश
गंगोरी से उत्तरकाशी तक 47.93 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। सुपरविजन के लिए 11 जेई और 4 एई तैनात किए गए हैं। हर साइट पर नागरिक सूचना पट लगाकर योजना की लागत, कार्य का विवरण और मानकों का खुलासा किया गया है।
निरीक्षण में बुनियाद की गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार को मानकों के अनुरूप कार्य के निर्देश दिए गए। मलबे के नीचे ग्राउंड लेबिल से ढाई मीटर गहरी बुनियाद खोद कर इसमें डेढ़ मीटर कंक्रीटिंग होनी है।
- पीएस पंवार, ईई सिंचाई विभाग उत्तरकाशी