गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन कर सत्ता पक्ष ने जाने अनजाने फिर से स्थायी राजधानी के मुद्दे को हवा दे दी है।
सत्ता पक्ष को रणनीति के तौर पर जवाब देने के लिए सत्र के दौरान विपक्ष इस मुद्दे को हवा देने की कोशिश में भी है। यह साफ है कि उत्तराखंड में राजधानी का सवाल अब और उलझ गया है।
गठित हुआ था राजधानी चयन आयोग
स्थायी राजधानी के सवाल पर ही भाजपा सरकार ने राज्य गठन के तुरंत बाद ही राजधानी चयन आयोग का गठन किया था। आयोग ने पूरेआठ साल और कई बार के विस्तार के बाद रिपोर्ट दी थी।
इस रिपोर्ट में गैरसैंण को जनभावना की राजधानी बताया गया था पर अवस्थापना के हिसाब से गैरसैंण के राजधानी के दावे का खारिज कर दिया गया था।
हालांकि आयोग ने यह भी यह भी कहा था कि राजधानी का मसला राजनीतिक और जनभावना का मसला है। ऐसे में स्थायी राजधानी के मसले पर राजनीतिक दलों ने चुप्पी साध कर रखी।
विजय बहुगुणा ने फिर उठाया मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने गैरसैंण में एक सत्र आयोजित करने का ऐलान कर स्थायी राजधानी के मुद्दे को हवा दी थी। पर सत्ता पक्ष कांग्रेस ने देहरादून में एक और विधानभवन की घोषणा कर गैरसैंण के स्थायी राजधानी के दावे को खुद ही कमजोर कर दिया।
अब नौ जून से गैरसैंण में हो रहे सत्र में विपक्ष की कोशिश सत्ता पक्ष की इसी कमजोरी पर उंगली रखने की भी है।
कांग्रेस भी नहीं तैयार
विपक्ष के रणनीतिकार मान रहे हैं कि इससे गैरसैंण में सत्र आयोजित करने से सत्ता पक्ष को मिल रहे क्रेडिट की आभा थोड़ी कम तो जरूर होगी।
कांग्रेस भी अंदरखाने गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा देने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर क्षेत्रीय दल के रूप में यूकेडी की कोशिश होगी कि इस मुद्दे को हवा दी जाए। ऐसे में भाजपा को सुर मिलाने में आसानी होगी।