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बुलंद हौसलों से लिखी सफलता की इबारत, पढ़िए इन बेटियों की कहानी

Mon, 22 Aug 2016 10:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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प्रियांशी (बाएं) और अंकिता - फोटो : ‌file photo
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जब हौसले बुलंद हों तो राह की हर मुश्किल आसान हो जाती है। इन बेटियों ने अपनी मेहनत से ऐसा कर ‌के दिखाया है। नीट परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करने वाली रोजीनाज अंसारी भी आज के युवाओं के लिए मिसाल है। पिता न होने के बावजूद रोजीनाज ने अपनी मेधा के दम पर नीट परीक्षा पास करते तक का सफर तय किया है। अब बलूनी क्लासेज ने रोजीनाज की एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च वहन करने की घोषणा की है।
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देहरादून में चंदरनगर निवासी नाहिद परवीन की तीसरे नंबर की सबसे छोटी बेटी रोजीनाज उस वक्त चार साल की थी, जब उसके पिता ने मां को तलाक दे दिया था। बेहद मुश्किल हालात में नाहिद परवीन अपने मायके आ गईं। यहां महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्था महिला समाख्या में नौकरी करने लगीं।

उनके सामने तीन बच्चों की परवरिश और बेहतर पढ़ाई सबसे बड़ी चुनौती थी। बड़ी बेटी की शादी होने के बाद दूसरे नंबर के बेटे को मार्केटिंग तक की पढ़ाई कराई। अब तीसरे नंबर की बेटी रोजीनाज का सपना भी बड़े स्कूल में पढ़ने का था लेकिन मां के पास इतने पैसे नहीं थे। महिला समाख्या की गीता गैरोला ने उसका दाखिला सेंट ज्यूड्स स्कूल में कराया।
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यहां रोजीनाज ने पहले ही साल में शानदार प्रदर्शन किया तो स्कूल ने 12वीं तक की पढ़ाई फ्री कर दी। रोजीनाज डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन उसके पास कोचिंग करने के लिए पैसा नहीं था। लिहाजा, मां नाहिद परवीन बलूनी क्लासेज पहुंची तो संस्थान ने कोचिंग का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार हो गया। एक साल की कड़ी मेहनत के बाद अब रोजीनाज ने नीट परीक्षा में 523 अंक हासिल कर इतिहास रच दिया।

फॉरेस्टर की बेटी ने किया प्रदेश में टॉप

प्रियांशी - फोटो : ‌file photo
एक साल की कड़ी मेहनत के बाद मोतीचूर निवासी फॉरेस्टर की बेटी प्रियांशी ने यूएपीएमटी परीक्षा में प्रदेश में टॉप किया है। उन्होंने इस साल केवल नीट और यूएपीएमटी की परीक्षा दी। दोनों ही परीक्षाओं में प्रियांशी ने शानदार सफलता हासिल की है। प्रियांशी अब डॉक्टर बनकर पहाड़ की सेवा करना चाहती है।

मूलरूप से पौड़ी के अगरोड़ा भवन्यू गांव और देहरादून में मोतीचूर निवासी फॉरेस्टर दिनेश सिंह बिष्ट की छोटी बेटी प्रियांशी ने भागीरथी विद्यालय हरिपुर कला से 10 सीजीपीए के साथ 10वीं पास करने के बाद गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज हरिद्वार से 94.6 प्रतिशत 12वीं की परीक्षा पास की। पिछले वर्ष यूपीएमटी का एग्जाम दिया लेकिन अच्छी रैंक नहीं आई। बावजूद इसके प्रियांशी ने हार नहीं मानी।

प्रियांशी ने बताया कि उन्होंने बलूनी क्लासेज में एक साल की कोचिंग की। इस साल नीट और यूएपीएमटी की परीक्षा दी। नीट परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 3692 और कैटेगरी में करीब 2500 रैंक हासिल की है, जबकि बुधवार को आए यूएपीएमटी एग्जाम में प्रियांशी ने प्रदेश में टॉप किया। प्रियांशी का सपना डॉक्टर बनकर प्रदेश की सेवा करना है। उन्हें हमेशा यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की वजह से होने वाली परेशानी से दुख होता है। वह चाहती हैं कि पहाड़ के दुर्गम से दुर्गम इलाके तक भी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हों।

सात प्रवेश परीक्षाओं में सफल हुई अंकिता

अंकिता पांडे - फोटो : AmarUjala
यूएपीएमटी की परीक्षा में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करते ही अंकिता पांडे ने इस साल सात प्रवेश परीक्षाओं में बाजी मारने की उपलब्धि अपने नाम कर ली। सिलसिलेवार नीट से लेकर यूएपीएमटी तक अंकिता पांडे सफलता हासिल करने में कामयाब हुई है।

मूलरूप से अल्मोड़ा के नौला गांव और दून में अजबपुर खुर्द निवासी श्री लक्ष्मण विद्यालय में कॉमर्स शिक्षक कैलाश चंद्र पांडे की सबसे छोटी बेटी अंकिता गत वर्ष प्रवेश परीक्षाओं में नाकाम होकर भी हौसला नहीं हारी। उन्होंने एक साल तक जीतोड़ मेहनत की। अपनी असफलता को ही अपनी सफलता का रास्ता बना लिया।

अंकिता ने सबसे पहले जीबी पंत विवि की प्रवेश परीक्षा में प्रदेश में टॉप किया। इसके बाद मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की परीक्षा में ऑल इंडिया 226 रैंक लाकर इतिहास रचा। अंकिता ने एम्स की प्रवेश परीक्षा में 873वीं रैंक हासिल की। मंगलवार को आए नीट 1 परीक्षा के परिणामों में अंकिता का यह सिलसिला जारी रहा। उन्होंने परीक्षा में ऑल इंडिया 367वीं और कैटेगरी में 298वीं रैंक हासिल की। एसजीआरआर पब्लिक स्कूल रेसकोर्स से 10 सीजीपीए के साथ 10वीं और 93.8 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं करने वाली अंकिता ने अब एआईपीवीटी में भी प्रदेश में टॉप और ऑल इंडिया में 16वीं रैंक हासिल की थी।
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पहले ही प्रयास में यामिनी बनी डॉक्टर

doctor - फोटो : demo
गत वर्ष 16 साल की उम्र में 12वीं पास करने वाली दून की यामिनी भट्ट भले ही उम्र की सीमा की वजह से कोई परीक्षा नहीं दे पाई थी लेकिन इस साल पहले ही प्रयास में उन्होंने नीट की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। इससे यामिनी के पूरे परिवार में खुशी की लहर है।

गत वर्ष ब्राइटलैंड स्कूल की छात्रा यामिनी ने 95 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास की। उनके पिता डीसी भट्ट के मुताबिक वह डॉक्टर तो बनना चाहती थी लेकिन मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में कम उम्र की वजह से हिस्सा नहीं ले पाई थी। उस वक्त यामिनी की उम्र केवल 16 साल थी जबकि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए कम से कम आयु 17 साल होनी चाहिए।

लिहाजा, यामिनी ने एक साल तैयारी करने का फैसला लिया। इस साल नीट की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 1688वीं और कैटेगरी में 1265वीं रैंक हासिल की है। बेटी की इस कामयाबी पर परिवार में खुशी का माहौल है।
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