अब उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र भी आईआईटी, आईआईएससी बंगलुरु जैसे संस्थानों के प्रोफेसर्स की क्लास ले सकेंगे।
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत जल्द इसकी शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत आने वाले 40 विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में ई-लर्निंग सेवा शुरू होगी। इससे पहले एडुसेट के माध्यम से यह कवायद की गई थी, जो चल नहीं पाई।
केंद्र सरकार से उच्च शैक्षिक संस्थानों के विकास के लिए अब रूसा के तहत बजट का आवंटन होता है। प्रदेश भर में 40 ऐसे महाविद्यालय और सरकारी विवि हैं, जहां रूसा के तहत ग्रांट आ रही है। अब इन कॉलेजों के छात्रों के लिए अत्याधुनिक ई-लर्निंग सेवा शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। पहले से ही दून विवि परिसर में मौजूद एडुसेट सैटेलाइट सेटअप का इस्तेमाल इस योजना में किया जाएगा।
रूसा के बजट से सभी ग्रांट हासिल कर रहे शैक्षिक संस्थानों में ई-क्लास की शुरुआत होगी। इसके तहत दूर दराज के डिग्री कॉलेजों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसे नामी संस्थानों के नामी प्रोफेसर लेक्चर दे सकेंगे। इसके तहत न केवल वह लेक्चर देंगे, बल्कि छात्र उनसे सीधे सवाल भी पूछ सकेंगे। हालांकि इससे पहले एक बार एडुसेट की यह योजना फ्लॉप हो चुकी है। लेकिन इस बार कई नए फीचर्स के साथ ई-लर्निंग की शुरुआत होगी।
रूसा के तहत ई-लर्निंग प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। इसके लिए मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह को फाइल भेजी गई है। जल्द ही वह बैठक बुलाएंगे। उम्मीद है कि इस बार जल्द ही योजना धरातल पर आ जाएगी।
- डॉ. सतपाल सिंह साहनी, कोऑर्डिनेटर, रूसा
Published By : Nirmala Suyal