आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक प्रोफेसर डीसी श्रीवास्तव ने बताया कि हिमालय की संरचनात्मक जटिलताओं को समझने के लिए उनके संस्थान ने एक नवीन तकनीक विकसित की है। जिसे स्ट्रेस इनवर्जन नाम दिया गया है। वह बृहस्पतिवार को नेशनल जिओ-रिसर्च स्कालर्स मीट के दूसरे दिन मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान में 65 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
मीट में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रोफेसर सोमनाथ दासगुप्ता ने हिमालय की निर्माण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने हिमालय के बारे में कई रोचक जानकारियां साझा कीं।
दिल्ली विवि के प्रोफेसर देवेश कुमार सिन्हा ने धरती की संरचनाओं को समझने के लिए फोरमिनिफेरा पादप के महत्व के बारे में बताया। अन्य कई वक्ताओं ने भी इस पादप की उपयोगिता को उजागर किया। कई वक्ताओं ने भूगर्भ में होने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी दी जो कि खनिज अध्ययन में काफी उपयोगी है।
कई शोधकर्ताओं ने भूकंप, उत्तर भारत प्लेट टेक्टानिक में सक्रिय सूक्ष्म स्तर की प्रक्रियाओं की जानकारी दी। सेमिनार में हिस्सा लेने वालों में डॉ. सुमनलता रावत, डॉ. समीर तिवारी डॉ. आदित्य खारया, प्रकाशम अनिल कुमार, प्रवीण कुमार आदि प्रमुख रहे।