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मेडिकल के बाद इंजीनियरिंग में भी कॉमन एंट्रेंस

Sat, 18 Jun 2016 04:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • एआईसीटीई ने शुरू की कवायद, राज्यों से सहमति का इंतजार
  • नीट की तर्ज पर एक ही परीक्षा से भरी जाएंगी बीटेक सीटें
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छात्र - फोटो : demo pic
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विस्तार
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मेडिकल दाखिलों की कॉमन प्रवेश परीक्षा नीट के आयोजन के बाद अब इंजीनियरिंग के बीटेक दाखिलों के लिए भी कॉमन प्रवेश परीक्षा कराने की कवायद शुरू हो गई है। इसके तहत राज्यों से बात की जा रही है। पहले से ही तमाम राज्य जेईई के स्कोर के आधार पर दाखिले दे रहे हैं।
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अभी तक सीबीएसई की ओर से आयोजित होने वाली जेईई मेंस परीक्षा से आईआईटी, आईएसएम, एनआईटी, ट्रिपल आईटी और सीएफआईटी में दाखिलों की राह खुलती है। इसके अलावा उत्तराखंड सहित कई राज्यों में जेईई मेंस की कॉमन मेरिट लिस्ट से दाखिले होते हैं।

कई राज्यों में दाखिला प्रक्रिया विलंब से शुरू होने की वजह से सरकारी कोटे की सीटें खाली भी रह जाती हैं। यूपी सहित कई राज्यों में राज्य की इंजीनियरिंग सीटों के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा होती है। कई नामी संस्थानों में भी अपनी प्रवेश परीक्षा से दाखिले होते हैं।
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प्रवेश परीक्षा में लाखों खर्च कर रहे छात्र

एंट्रेंस - फोटो : demo pic
मेडिकल की तरह इंजीनियरिंग में भी छात्र को लाखों रुपये का खर्च प्रवेश परीक्षाओं में ही करना पड़ता है। लिहाजा, कॉमन प्रवेश परीक्षा होने से न केवल छात्रों का खर्च बच जाएगा बल्कि इंजीनियरिंग की सीटें खाली रहने का संकट भी काफी हद तक दूर हो जाएगा।

इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डीके मिश्रा के मुताबिक इंजीनियरिंग में कॉमन प्रवेश परीक्षा की सख्त जरूरत है। इससे इंजीनियरिंग में अलग ही डेकोरम मेंटेन होगा। एआईसीटीई के ऑफिशियल सूत्रों के मुताबिक इस पर काम शुरू हो चुका है। राज्यों से बात की जा रही है।

उत्तराखंड में 60 प्रतिशत से ऊपर सीटें खाली
कई राज्यों में इंजीनियरिंग बुरे दौर से गुजर रही है। उत्तराखंड में भी हर साल 60 प्रतिशत से ऊपर बीटेक सीटें खाली पड़ी रह जाती हैं। कई कॉलेज बंद हो चुके हैं, कई बंदी के कगार पर पहुंच चुके हैं। प्रदेश में तकनीकी विवि की ओर से जेईई मेंस की स्टेट रैंक के आधार पर दाखिले किए जाते हैं। यह रैंक गत वर्ष तक सबसे विलंब से मिलती आई है, जिससे एडमिशन कम होते हैं। कॉमन एंट्रेंस होने से देशभर में एक साथ इंजीनियरिंग दाखिले शुरू हो सकेंगे।
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