छात्र संख्या के लिहाज से सबसे बड़े माने जाने वाले देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में लॉ और बीएड की मान्यता पर खतरा मंडरा रहा है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया(बीसीआई) ने पिछले वर्ष शपथ पत्र के आधार पर बमुश्किल मान्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी, जबकि नेशनल काउंसिल फॉर टीचिंग एजुकेशन(एनसीटीई) ने भी शपथ पत्र के आधार पर गत वर्ष मौका दे दिया था। इस साल तय मानक पूरे नहीं हुए तो दोनों पाठ्यक्रम बंद हो सकते हैं।
बीसीआई की ओर से दो वर्षों से लगातार एलएलबी शिक्षकों की भर्ती को कहा जा रहा है। बीसीआई को गत वर्ष भी शपथ पत्र देकर किसी तरह 300 सीटों की मान्यता ले ली गई थी। इसी प्रकार, बीएड में भी सीटों की संख्या 100 से घटकर 50 हो गई थी। बावजूद इसके शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने एनसीटीई को शपथ पत्र दिया था।
एनसीटीई की ओर से इंस्पेक्शन शुरू होने वाला है। ऐसे में बीएड की मान्यता खतरे में है। कॉलेज में अगर समय रहते नए शिक्षकों की भर्ती न हुई तो एलएलबी और बीएड की कक्षाओं पर ताला लगने की नौबत आ जाएगी।
आसान नहीं है शिक्षक भर्ती की राह
दरअसल, डीएवी कॉलेज में शिक्षक भर्ती में विवाद होने के बाद से वर्ष 2009 के बाद कोई भर्ती नहीं हुई। साल दर साल टीचर रिटायर हो रहे हैं लेकिन उनकी जगह पढ़ाने वाला कोई नहीं है। सरकार से कई बार शिक्षकों की भर्ती के लिए कॉलेज प्रशासन ने मांग रखी है लेकिन सरकारी सिस्टम भी बेपरवाह है।
बीसीआई से जो पत्र मिला है, उसके आधार पर हमने निदेशक, उच्च शिक्षा को पत्र भेज दिया है। उन्होंने अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। उम्मीद है कि जल्द ही कोई अच्छी खबर आएगी। एनसीटीई के हिसाब से भी शिक्षकों की संख्या पूरी की जाएगी।
- डा. राकेश वर्मा, कार्यवाहक प्राचार्य, डीएवी