अखिल भारतीय वानिकी शोध एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) और इससे जुड़े संस्थानों में मनमानी और भ्रष्टाचार का आलम यह है कि यहां मंत्रालय की भी नहीं चलती।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सचिव मालती रावत के पत्र को तो कूड़े में डाल दिया गया, लेकिन संस्थान में बैठे आकाओं ने खुद नए पद बनाकर भर्ती कर ली। पुराने निर्धारित ग्रेड पे को अपनी मर्जी से परिवर्तित कर लिया।
सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के साइंटिफिक डिपार्टमेंट की टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
सीएजी की टीम ने मार्च 2014 में आईसीएफआरई और इससे जुड़े संस्थानों में ऑडिट किया। इसकी रिपोर्ट दो अप्रैल को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी गई।
रिपोर्ट में ऑडिट टीम ने शोध संस्थानों में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल की पोल खोली है। इस वजह से एफआरआई और सभी संस्थानों में हड़कंप है। कुछ आला अधिकारी दिल्ली में डेरा जमाए हैं। मकसद है कि ऑडिट रिपोर्ट की यह जानकारियां जगजाहिर न हों।
ऐसे हुआ नियुक्तियों में खेल
- वर्ष 2007 में आईसीएफआरई ने दस विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के पदों को डिप्टी कंजरवेटर आफ फॉरेस्ट (डीसीएफ) में परिवर्तित कर दिया। इसके बाद इन पदों को खुद ही अपग्रेड करके कंजरवेटर आफ फॉरेस्ट (सीएफ) कर दिया गया। इस परिवर्तन के लिए वित्त मंत्रालय की अनुमति तक नहीं ली गई।
- आईसीएफआरई ने दिसंबर 2013 में अनाधिकृत तरीके से 59 सीएफ/डीसीएफ के पद बनाए और इन पर भर्ती कर ली। इसके लिए भी वित्तमंत्रालय की अनुमति नहीं ली गई।
- संस्थान में 509 वैज्ञानिकों के पद घटाकर 280 कर दिए गए, जबकि आईएफएस की संख्या 10 से बढ़ाकर 69 कर दी गई।
- संस्थान में 30 साल से कार्यरत सेक्शन आफिसर रेशमा देवान को ग्रेड पे 4600 दिया जा रहा है। केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय की अंडर सेक्रेटरी मालती रावत ने आईसीएफआरई को आदेश जारी किए कि वह ग्रेड पे नियमानुसार 4800 कर दे, लेकिन संस्थान ने उनकी एक न सुनी।
- नियम विरुद्ध आईसीएफआरई ने सेक्रेटरी का पद बनाया। इस पर छह साल से डेपुटेशन पर आए सुधांशु गुप्ता कार्यरत हैं। यहां दो गलतियां हुई हैं। पहली यह है कि नया पद बनाने के लिए वित्त मंत्रालय से अनुमति नहीं ली गई और दूसरी यह कि डेपुटेशन की अधिकतम पांच वर्ष की सीमा को एक वर्ष ऊपर हो गया है, लेकिन संस्थान ने उन्हें नहीं हटाया।
- संस्थान के न्यू फारेस्ट हास्पिटल के लिए ग्रेड पे 5400 और 6600 निर्धारित है, लेकिन यहां नियम विरुद्ध 7600, 8700 और 10,000 का ग्रेड पे दिया जा रहा है, जिसके लिए कोई अनुमति मंत्रालयों से नहीं ली गई।