राजधानी देहरादून के रेलवे स्टेशन को हर्रावाला शिफ्ट करना रेलवे को मंजूर नहीं है। रेलवे ने जिला प्रशासन और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के इस प्रस्ताव को नकार दिया है। रेलवे का मानना है कि स्टेशन को शिफ्ट करने से रेल मुसाफिरों की परेशानियां बढ़ जाएंगी।
जिला प्रशासन, एमडीडीए और पुलिस रेलवे स्टेशन को शहर से बाहर शिफ्ट करने का काफी समय से प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों की मुरादाबाद रेलवे मंडल के अफसरों से कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
मुसाफिरों की परेशानी बढ़ेगी
दून दौरे पर आए मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम), मुरादाबाद सुधीर अग्रवाल ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि दून स्टेशन को हर्रावाला शिफ्ट करना पूरी तरह से अव्यवहारिक है। इससे मुसाफिरों की परेशानी बढ़ जाएगी।
इसके अलावा रेलवे को हर्रावाला में भू-अधिग्रहण के लिए भी जटिल प्रक्रिया से गुजरते हुए करोड़ों रुपये खर्च करने होंगे। साथ ही वर्षों पुराने दून स्टेशन की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में बनी पहचान पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
दून स्टेशन को मॉडल स्टेशन बनाया जा सकता है। कहा कि हर्रावाला से शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचने के लिए, रात में खासकर महिला यात्रियों की सुरक्षा के संबंध में खतरा रहेगा।
काफी समय से स्टेशन के विस्तार की मांग
उधर, जिला प्रशासन का तर्क है कि रेलवे स्टेशन के हर्रावाला शिफ्ट होने पर शहर में यातायात की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाएगी। खासतौर पर आढ़त बाजार, गांधी रोड पर अक्सर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी।
नार्दन रेलवे मेंस यूनियन (नरमू) के शाखा सचिव उग्रसेन सिंह ने बताया कि यूनियन काफी समय से दून रेलवे स्टेशन के विस्तार की मांग कर रही है। दून स्टेशन की क्षमता बढ़ाकर इसे मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे देहरादून आने वाली ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।