भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक ने राज्य सरकार के वित्त एवं कार्यप्रणाली के ऑडिट में करीब 461.81 करोड़ रुपये की अनियमितता पकड़ी है। ये राशि विभागों के सैंपल ऑडिट में सामने आई है।
ऑडिट का दायरा और व्यापक होता तो ये राशि और भी बढ़ी हो सकती थी। ऑडिट में सरकार के कामकाज के तौरतरीकों में कई गंभीर और बड़ी खामियां सामने आई हैं। कैग ने ऑडिट में पाया कि प्रदेश सरकार ने खुले बाजार से 7.96 प्रतिशत ब्याज दर पर उधारी को निगमों और सहकारी संस्थाओं में निवेश किया मगर इसका रिटर्न न के बराबर रहा।
बता दें कि मंगलवार को राज्य सरकार ने विधानसभा के पटल पर महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन प्रस्तुत किए थे। बुधवार को रिपोर्ट के संबंध में उत्तराखंड के महालेखाकार (लेखापरीक्षा) सौरभ नारायन ने पत्रकार वार्ता की। उन्होंने रिपोर्ट के कुछ अहम बिंदुओं पर रोशनी डाली।
उन्होंने कहा कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में 461.81 करोड़ रुपये के आडिट पैरा तैयार किए हैं। ऑडिट में पकड़ी गई खामियों में सुधार की वजह से सरकार 18.20 करोड़ रुपये की रिकवरी कर सकी है। कैग ने तीन विभागों का परफॉरमेंस आडिट किया है। इसमें शिक्षा का अधिकार अधिनियम भी शामिल है।
आडिट में स्टांप शुल्क एवं निबंधन शुल्क के संग्रहण की विधियों एवं तरीकों में कई कमियां थीं, जिनकी वजह से 128.35 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। उन्होंने ऑडिट प्रक्रिया के दौरान ही कई तरह की प्रक्रियात्मक खामियां ठीक हुई।
करोड़ों की उधारी, रिटर्न जीरो
कैग ने ऑडिट में यह तथ्य भी उजागर किया कि सरकार ने खुले बाजार से 7.96 प्रतिशत की ब्याज दर पर उधार की राशि उठाई। ये राशि निगमों, ग्रामीण बैंकों, संयुक्त स्टॉक कंपनियों और सहकारी संस्थाओं में निवेश की गई।
मगर इस निवेश पर औसत प्रतिफल नगण्य रहा। वर्ष 2011-12 में 1,338 करोड़ के निवेश के प्रतिफल की दर 0.004 प्रतिशत रही। 2012-13 में निवेश 2,397 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसका प्रतिफल 0.01 प्रतिशत रहा। 2015-16 में 2914 करोड़ का निवेश हुआ, जिसका प्रतिफल 0.18 प्रतिशत ही रहा।