ऐसे होती है प्रक्रिया
कर्नल कोठियाल ने बताया, शरणार्थियों के प्रार्थनापत्र पर पहले जिला स्तरीय समिति विचार विमर्श करती है। बाद में इंटेलीजेंस जांच कराई जाती है। इंटेलीजेंस से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद अगली और अंतिम प्रक्रिया साक्षात्कार की होती है। इसके बाद प्रार्थनापत्रों पर मंजूरी और नामंजूरी का फैसला लिया जाता है। अंत में मंजूरी मिलने पर व्यक्ति विशेष को प्रमाणपत्र डाउनलोड करने होते हैं।
इन जिलों में रहने वालों को मिली नागरिकता
देहरादून- 145
हरिद्वार- 02
उत्तरकाशी- 01
टिहरी- 01