आपदा बीते भले ही 10 महीने हो चुके हैं। मगर इसका खौफ श्रद्घालुओं से ज्यादा वाहन चालकों में नजर आ रहा है।
आरटीओ चिंतित
यही वजह है कि चार धाम यात्रा के लिए वाहन संचालकों ने अब तक ग्रीन कार्ड लेना शुरू नहीं किया है। बीते साल इस वक्त तक कई आवेदन आ चुके थे। संचालकों के इस रुख से आरटीओ भी चिंतित है।
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कुछ ही दिन में शुरू होने वाली चार धाम यात्रा की मुकम्मल तैयारियों के लिए राज्य सरकार की कवायद जारी है। आपदा पीड़ित वाहन संचालकों को अगले दो साल के लिए टैक्स छूट दी गई है।
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फिर भी चार धाम रूट की बदहाली और आपदा का अनुभव देखते हुए कई वाहन संचालक सहमे हैं। उन्हें यह भी डर है कि ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर गाड़ी लेकर चले तो मेंटेनेंस में ही हजारों रुपए खर्च हो जाएंगे।
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कुछ को श्रद्घालुओं की कम आमद से धंधा मंदा रहने का अंदेशा है। वाहन संचालक राजेश अग्रवाल बताते हैं कि वे इस बार ग्रीन कार्ड नहीं लेंगे। एआरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि ग्रीन कार्ड के लिए अभी कम लोग आए हैं।
संचालक इस बार थोड़ा डरे हुए हैं। आने वाले दिनों में आवेदन आ सकते हैं।
टैक्स छूट से हो सकता है फायदा
आपदा प्रभावित ट्रेवल एजेंसियों को राहत देते हुए दो साल का टैक्स माफ कर दिया गया है। आरटीओ को उम्मीद है इस लालच में कई दूसरे वाहन संचालक भी ग्रीन कार्ड लेने आएंगे।
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कई ऐसे वाहन संचालक हैं, जो पूछताछ कर रहे हैं कि क्या सरकार इस वर्ष ग्रीन कार्ड लेने वालों के लिए भी अगले दो साल तक टैक्स फ्री कर सकती है।
पिछले साल इतने ग्रीन कार्ड जारी हुए
------ देहरादून - ऋषिकेश - हरिद्वार
टैक्सी - 472 - 1648 - 530
बस - 530 - 2071 - 587
मिनी बस - 64 - 137 - 379
अन्य - 120 - 1586 - 103