रुड़की की साकेत कॉलोनी में रहने वाले उद्यमी विजय कुमार मारवाह का परिवार इकलौते बेटे रमन मारवाह की मौत से बुरी तरह टूट गया है। रुड़की जेल के गेट पर हुए गैंगवार में रमन की मौत हो गई थी।
रमन की मां, पत्नी और आठ साल की बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है तो वहीं पिता के चेहरे पर छाई मायूसी भी उनके दिल के दर्द को बयां कर रही है।
पिता के मन में एक ही बात रह-रहकर उठ रही है कि काश, रमन ने उनकी बात मान ली होती और गलत संगत छोड़ दी होती तो शायद आज उन्हें यह दिन नहीं देखना होता।
काश! मान ली होती पिता की बात
विजय मारवाह ने अमर उजाला से हुई बातचीत में बताया कि उनका बेटा कोई गलत काम नहीं करता था। उसके खिलाफ कभी कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ और न ही ऐसा कोई काम भी उसने किया जिसके कारण पुलिस या अन्य लोगों ने परिवार वालों को परेशान किया हो।
कहा कि कुछ गलत लोगों के पास उठने-बैठने की उसकी आदत न केवल उसकी जान की दुश्मन बन गई बल्कि पूरे परिवार को ऐसा सदमा दे गई जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। विजय मारवाह के अनुसार उन्होंने रमन को गलत संगत से दूर रहने के लिए कई बार समझाया था।
उसने करीब छह महीने पहले उनकी बात मान भी ली थी और घर तथा फैक्ट्री पर ही ज्यादा समय बिताता था। लेकिन चीनू पंड़ित की जमानत लेने के लिए उसने घरवालों से यह झूठ बोलकर फैक्ट्री के दस्तावेज लिए कि वह फैक्ट्री का विस्तार देने के लिए बैंक से ऋण लेने जा रहा है।
पांच अगस्त को जेल पर हुए हमले में रमन की मौत के बाद पता चला कि उसने जमानत के लिए यह दस्तावेज लिए थे।
रमन को दी गई श्रद्धांजलि
यह वारदात ऐसे बेगुनाह युवाओं के लिए सबक बन सकती है जो अपराध की काली दुनिया का सच जाने बिना ही इसके आकर्षण में बंधकर अपराध की दुनिया से जुड़े लोगों के आगे-पीछे मंडराते रहते हैं। बाद में उनके परिवार को उनकी इस गलती की सजा भुगतनी पड़ती है
साकेत कालोनी स्थित श्रीहरमिलाप धर्मशाला में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में रमन मारवाह को परिवार वालों, रिश्तेदारों तथा आसपास के लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।