उत्तराखंड में बीयर के उत्पादन-कारोबार को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने को लेकर सरकार की ओर से तैयार की गई लघु आसवानी (माइक्रो ब्रेवरी) नीति को कारोबारियों ने नकार दिया है। फ्लाप होते देख सरकार और आबकारी विभाग ने भी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
राज्य में बीयर के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए आबकारी विभाग की ओर से तैयार किए गए मसौदे में तीन करोड़ की लागत से छोटे-छोटे प्लांट लगाए जाने थे, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली बीयर का उत्पादन होना था। इससे जहां उत्पाद शुल्क, अनुज्ञापन शुल्क व वाणिज्य शुल्क के रूप में राजस्व की प्राप्ति होती, वहीं बीयर की खपत बढ़ने से इसके निर्माण में काम आने वाले गेहूं और जौ जैसे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ती।
लघु आसवानी नीति के मसौदे के मुताबिक कारोबारियों की ओर से आवेदन करने के 30 दिन के भीतर लाइसेंस जारी करना था। प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक साल के भीतर प्लांट लगाना था। आबकारी विभाग ने लघु आसवानी में तैयार बीयर के विपणन की भी व्यवस्था कर ली थी।
तैयार बीयर को जीएमवीएन और केएमवीएन के माध्यम से बेचा जाता। लेकिन विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो एक भी कारोबारी ने लघु आसवानी प्लांट लगाने के लिए आवेदन नहीं किया। संयुक्त आबकारी आयुक्त बीएस चौहान ने बताया कि अभी तक एक भी कारोबारी ने इसके लिए आवेदन नहीं किया।