जम्मू-कश्मीर की बाढ़ ने न केवल देहरादून के सेब व्यावसायियों को करारा झटका दिया है, बल्कि ग्राहकों की भी जेब पर मार की आशंका है।
कारोबारियों को लाखों का नुकसान
कश्मीरी सेब की आवक बंद हो गई है। फिलहाल हिमाचल प्रदेश खास तौर पर त्यूनी से आने वाला सेब अंतिम चरण में चल रहा है। ऐसे में स्थानीय कारोबारियों को लाखों के नुकसान की आशंका है। ग्राहकों को भी महंगा सेब खरीदना पड़ेगा।
कारोबारी इस बाढ़ से सकते में हैं। जैसे हालात चल रहे हैं, आवक आधे से भी कम रहने की आशंका है। अकेले दून की निरंजनपुर स्थित मंडी की बात करें। यहां हर रोज कश्मीरी सेब के तकरीबन पांच-छह ट्रक पहुंचते हैं।
यानी लगभग 3000 पेटी यहां हर रोज उतरती हैं। एक ट्रक में 500 के करीब पेटी आती हैं और एक पेटी में तकरीबन 14-15 किलो के आस-पास सेब होता है। दून में कश्मीरी सेब की सप्लाई जम्मू-कश्मीर के सोपोर, पुलवामा आदि स्थानों से होती है, लेकिन बाढ़ के चलते हालात खराब हैं।
यहां बाग-के-बाग उजड़ गए हैं। दून में अक्तूबर से लेकर जनवरी तक तकरीबन छह माह कश्मीरी सेब के सहारे ही कारोबार चलता है।
दून की मंडी से ही प्रदेश में अन्य स्थानों समेत यूपी के कुछ इलाकों को कश्मीरी सेब की सप्लाई होती है। बाढ़ से फिलहाल आवक बंद है, लिहाजा यह सप्लाई भी नहीं हो रही। फिलहाल यह नुकसान लाखों में है।
- अनिल अदलखा, फलों के थोक व्यापारी, निरंजनपुर मंडी
कश्मीर से तुड़ान वाला सेब 15 सितंबर तक आना शुरू होता है। इसमें अवश्य दिक्कत होगी। अभी जो सेब आ रहा था, वह गिरा हुआ था। इसकी आवक बंद हो गई है। त्यूनी से भी अबकी कम सेब आ रहा है।
- पंकज राज शाह, मंडी निरीक्षक