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खुशखबर: 18 साल बाद यूपी-उत्तराखंड के बीच हुआ परिवहन करार, नेपाल तक इन रूटों पर चलेंगी बसे 

Tue, 30 Oct 2018 08:49 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ/देहरादून
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सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत
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राजस्थान व हरियाणा के बाद अब यूपी और उत्तराखंड (यूके) के बीच भी परिवहन निगम की बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और परिवहन मंत्रियों की मौजूदगी में बसों के संचालन के संबंध में सोमवार को समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

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समझौते के मुताबिक यूपी परिवहन निगम की बसें उत्तराखंड के 216 मार्गों पर 1,39, 071 किलोमीटर तक चलेंगी, जबकि उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों का यूपी के 335 मार्गों पर 2,52,592 किमी तक संचालन होगा। दोनों राज्यो के बीच साधारण, एसी, वोल्वो और स्कैनिया बसों का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा दोनों राज्यों के बीच निजी बस संचालकों द्वारा भी 27 मार्गों पर 56787 किमी. तक बसों का संचालन होगा।

कालीदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पारस्परिक परिवहन समझौता पत्र पर प्रदेश की प्रमुख सचिव परिवहन अराधना शुक्ला और उत्तराखंड के सचिव एवं आयुक्त परिवहन शैलेश बगौली ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व परिवहन मंत्री यशपाल आर्य मौजूद रहे। दोनों राज्यों के परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच समझौता पत्र का आदान-प्रदान किया गया।
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इस समझौते के बाद अब यूपी की राजधानी लखनऊ, अयोध्या, बहराइच, समेत प्रदेश के वाराणसी, आगरा, प्रयागराज, मथुरा, मुरादाबाद, बरेली, सहारनपुर, मेरठ, वृंदावन, कानपुर और उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, कोटद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल, काठगोदाम, रामनगर, काशीपुर, टनकपुर ऊधमसिंह नगर आपस में परिवहन सेवा से जुड़ जाएंगे।

इन रूटों पर चलेंगी बसें
दिल्ली-ऋषिकेश, दिल्ली-देहरादून, दिल्ली-कोटद्वार, दिल्ली-हल्द्वानी, दिल्ली-हरिद्वार, मथुरा-हरिद्वार, आगरा-सहारनपुर-देहरादून, आगरा-मेरठ ऋषिकेश, मुरादाबाद-हल्द्वानी, मुरादाबाद-हरिद्वार-सहारनपुर, अलीगढ़-हल्द्वानी, बरेली-हरिद्वार, लखनऊ-देहरादून, कानपुर-ऋषिकेश, बहराइच-रूपेडिहा-हरिद्वार, वाराणसी-लखनऊ-बरेली-हरिद्वार, मथुरा-जयपुर-मथुरा-हरिद्वार, दिल्ली-मुरादाबाद-बनबसा-महेंद्र नगर (नेपाल)।
 


 

योगी आदित्यनाथ बोले, राजनीतिक कारणों से लटका समझौता

उन्होंने कहा कि इस समझौते से दोनों राज्यों के बीच आम लोगों के आने-जाने की सुगम यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी। साथ ही चारधाम यात्रा पर जाने वाले गरीब तीर्थ यात्रियों को सस्ती परिवहन सेवा मुहैया हो सकेगी। योगी ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच कई ऐसे मसले हैं, जो डेढ़ साल में सुलझाए गए हैं।
जबकि कुछ मसले अभी बाकी हैं, जिन्हें जल्द सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की सरकारों ने तय किया है कि अब संकुचित सोच में न पड़कर वर्षों से लंबित विवादों का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही अयोध्या व नेपाल के जनकपुर के बीच भी बस सेवा शुरू की जाएगी। इसके लिए नेपाल से करार हो चुका है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच सिंचाई विभाग, अतिथि गृहों के अलावा परिवहन निगम की बसों के संचालन का मामला भी 2003 से लटका था। एक तरह से 18 साल बाद दोनों राज्यों के बीच परिवहन की बसों के संचालन का सपना साकार हो रहा है। कहा कि जब से दोनों राज्यों में भाजपा नीति सरकारें बनी हैं, तब से दोनों राज्यों के बीच के लंबित विवादों का निस्तारण तेजी से हो रहा है।
 
इसी कड़ी में 42 वर्षों से लटकी बहुउद्देशीय लखवाड़ बांध परियोजना का भी निस्तारण केन्द्र सरकार ने मात्र एक बैठक में कर दिया है। यह परियोजना 7 राज्यों से जुड़ी है। इसी तरह हिमाचल में रेणुका बांध और टोन्स नदी पर बांध बनाने के मसले का भी समाधान निकाल लिया गया है। उन्होंने यूपी सरकार को आश्वस्त करते हुए कहा कि जो शेष मसले लटके हैं, उनका जल्द ही समाधान कर लिया जाएगा। इस मौके पर यूके के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य और यूपी के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी संबोधित किया।

कुंभ के लिए 51 बसों को रवाना किया
इस मौके पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत कई अन्य मंत्रियों ने जनवरी से लगने वाले कुंभ मेला में आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए शटल बसों के संचालन का भी शुभारंभ किया। सरकार ने कुंभ के दौरान प्रयाग में कुल 500 शटल बस चलाने की घोषणा की है, जिसमें से सोमवार को 51 बसों को हरी झंडी दिखाकर प्रयाग के लिए रवाना किया गया। इसके अलावा तीन सीएनजी बसों को भी हरी झंडी दिखाई गई। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास में नवनिर्मित कॉन्फ्रेंस हाल का लोकार्पण भी किया गया।
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अब नेपाल सेवा पर फोकस 

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सोमवार को परिवहन करार के बाद अब उत्तराखंड परिवहन निगम नेपाल सेवा पर फोकस करेगा। इसके अलावा हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के साथ ही परिवहन करार की कवायद तेज की जाएगी, जिससे अन्य राज्यों के बीच आवागमन सुचारु और सुविधाजनक हो सके। 
कई वर्षों की कवायद के बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बीच परिवहन करार सोमवार को हो गया। इससे दोनों राज्यों के बीच रोडवेज का सफर बेहतर हो जाएगा। दोनों राज्यों के धार्मिक स्थलों पर काफी संख्या में पर्यटक आसानी से आ और जा सकेंगे। 

इसके बाद अब परिवहन निगम का अगला लक्ष्य भारत-नेपाल के बीच बसों का संचालन है। इसे लेकर गत 28 सितंबर को राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) की बैठक में भी निर्णय लिया जा चुका है, जिसके तहत दिल्ली और देहरादून से एक एक बसें चलाई जाएंगी। बसें उत्तर प्रदेश होते हुए नेपाल जाएंगी, ऐसे में परिवहन करार होने के बाद जल्द ही नेपाल बस सेवा शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा परिवहन विभाग हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली से भी परिवहन करार करने की कवायद शुरू कर दी है। इससे इन राज्यों के लिए लोगों का सफर और भी आसान हो जाएगा। 

समझौते से लाखों यात्रियों को होगी सुविधा 
रोडवेज महाप्रबंधक प्रशासन निधि यादव का कहना है कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम से करार के बाद इसका लाभ लाखों यात्रियों को मिलेगा। अभी तक दोनों प्रदेशों के बीच बसों के फेरे कम होने के चलते यात्रियों को ट्रेन का अधिक प्रयोग करना पड़ता था। अब उत्तराखंड परिवहन निगम यूपी के 335 मार्गों पर बसे संचालित कर सकेगा, जबकि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम उत्तराखंड में 216 मार्गों पर बसे संचालित करेगा। प्रदेश के निजी बस संचालकों की ओर से यूपी में 27 मार्गों पर बसें संचालित की जाएंगी। इसी तरह यूपी के निजी बस संचालकों की ओर से 27 मार्गों पर यहां बसें संचालित की जाएंगी। करार से उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें यूपी के विभिन्न शहरों से होकर दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश में कई नई सेवाएं शुरू कर सकेगा।  

निगमों की आय में होगा इजाफा 
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड परिवहन निगम के बीच करार से दोनों राज्यों के बीच लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। इसके साथ ही निगम की आमदनी में भी इजाफा होगा। 

उत्तराखंड परिवहन निगम के लिए आज का दिन विशेष है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम से करार के बाद दोनों राज्यों के बीच आवागमन आसान हो जाएगा। अब परिवहन निगम नेपाल में बसों का संचालन करने की कवायद शुरू करेगा। 
- शैलेश बगौली, परिवहन सचिव 
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