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भारत का ऐसा राज्य जहां रिटायर नहीं होते नौकरशाह, सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप

Thu, 27 Jul 2017 08:59 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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ऑफिस - फोटो : demo pics
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भारत में एक ऐसा राज्य है जहां नौकरशाह कभी रिटायर नहीं होते हैं। सरकार उन पर सालाना 36 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
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साठ साल की उम्र पूरी करके सेवानिवृत्त हो चुके अफसरों पर उत्तराखंड प्रदेश की सरकारें मेहरबान है। पिछली सरकारों में धड़ल्ले से पुनर्नियुक्ति और सेवा विस्तार का सिलसिला त्रिवेंद्र सरकार में भी बदस्तूर चला आ रहा है।

मौजूदा सरकार में जिन अफसरों की पुनर्नियुक्ति और सेवा विस्तार बरकरार रखा गया है, उनकी संख्या 100 के पार हो चुकी है। सचिवालय से लेकर विभागों में तैनात इन साठ पार अफसरों के वेतन और अन्य सरकारी सुविधाओं पर दो करोड़ रुपए महीना खर्च का अनुमान है।
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तीन करोड़ रुपये महीने का खर्च

Demo pic
इसमें विभिन्न आयोगों, निगमों और समितियों में पुनर्नियुक्ति पाए अफसर और उन्हें दी गई सुविधाओं को जोड़ कर देखें तो ये खर्च तीन करोड़ रुपये महीना हो जाता है।

इस रकम में वेतन के अलावा दफ्तर, स्टाफ, गाड़ी और अन्य अनुमन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। रिटायरमेंट के बावजूद उनकी तैनाती को सरकार जरूरी बता रही है । उसका कहना है कि अफसरों की कमी की वजह से सरकार सेवानिवृत्त अधिकारियों की सेवाएं ले रही है।
 
इसके ठीक उलट, जानकार बताते हैं कि यह बीमारी इसलिए बढ़ती जा रही है कि अफसरों की कमी पूरा करने में किसी को दिलचस्पी नहीं है। दरअसल, प्रत्येक पांच साल में आईएएस के काडर का रिव्यू होता है। वर्ष-2010 के बाद से रिव्यू नहीं हुआ है।

प्रमोटी आईएएस का कोटा रिव्यू के बाद बढ़ने वाले पदों में शामिल होगा

सूत्रों की मानें तो बड़े पदों पर बैठे नौकरशाह नहीं चाहते कि आईएएस अफसरों के पद राज्य में बढ़ें, क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो प्रमोटी आईएएस अफसर का कोटा भी रिव्यू के बाद बढ़ने वाले पदों में शामिल किया जाएगा।

कार्मिक विभाग के सूत्रों की मानें तो वर्ष-2015 में डीओपीटी को उत्तराखंड से भेजे गए प्रस्ताव में राज्य के विभिन्न पद आईएएस के लिए घोषित करने की बात तो कही गई थी, मगर पद बढ़ाने का जिक्र नहीं किया गया।

इस संबंध में आईएएस एसोसिएशन के सेक्रेट्री आनंद बर्धन का कहना है कि काडर रिव्यू के संबंध में भारत सरकार की जो भी व्यवस्था है वह होनी चाहिए। पूर्व में अफसरों की संख्या मौजूद पदों के मुकाबले पर्याप्त होंगी, इसलिए पद बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं भेजा गया होगा।

सवाल जो उठ रहे हैं?

- सरकार पचास साल में मुलाजिमों का इम्तहान लेगी मगर ये इम्तहान रिटायर अफसरों के लिए क्यों नहीं है?
- सिर्फ नौकरशाहों और अफसरों को ही पुनर्नियुक्ति का तोहफा क्यों मिलता है?
- सरकार खराब माली हालत का रोना रोती है लेकिन करोड़ों रुपये रिटायर अफसरों पर क्यों लुटाती है?
- रिटायर होने वाले क्या सभी टेक्नोक्रेट्स और नौकरशाह इतने फिट और योग्य होते हैं कि सरकार उन्हें छोड़ना नहीं चाहती? 

पूर्व मुख्य सचिवों का होता रहा पुनर्वास
पूर्व मुख्य सचिव आरएस टोलिया, एस.के.दास, इंदु कुमार पांडेय, एनएस नपल्च्याल, सुभाष कुमार, आलोक कुमार जैन व शत्रुघ्न सिंह राज्य सूचना आयोग, सेवा का अधिकार आयोग, राज्य विद्युत नियामक आयोग, वेतन समिति, राज्य लोक सेवा आयोग में एडजस्ट हुए। इस मामले में पूर्व मुख्य सचिव राकेश शर्मा को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधान मुख्य सचिव जैसा पद क्रिएट कर उस पर बिठा दिया।
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रिटायरमेंट से पहले ही एडजस्टमेंट

ias officer - फोटो : ias officer
पूर्व आईएएस अफसर डीएस गर्ब्याल और सचिव सीएस नप्ल्च्याल का सेवा पर रहते हुए एडजस्मेंट हो गया। रिटायर होने से पहले ही गर्ब्याल सेवा का अधिकार आयोग के सदस्य बना दिए गए। गुपचुप तरीके से उनकी शपथ की तैयारी भी हो गई मगर विवाद के चलते उन्हें पुनर्वास के लिए इंतजार करना पड़ा। सचिव पद पर तैनात सीएस नप्ल्च्याल को तो पूर्व सरकार ने चुनाव के ठीक पहले तीन महीने का सेवा विस्तार दे गई। सेवानिवृत्त होने के बावजूद नप्ल्च्याल सचिव पद पर तैनात हैं।

विभागों तक पहुंचा पुनर्नियुक्ति का रोग
समाज कल्याण निदेशालय की कमान विष्णु धनिक के हाथों में हैं। धनिक रिटायर हो चुके हैं, और हाल में सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार दिया है। नियमानुसार इतनी लंबी अवधि के लिए सेवा विस्तार देना राज्य सरकार के हाथ की बात ही नहीं है। कुछ इसी तरह पुलिस अधिकारी टीडी बेला सेवानिवृत्ति के बाद भी बावर्दी दुरुस्त नजर आते हैं। सरकार की मेहरबानी पाने वाले ये अकेले अफसर नहीं है। अनुभव के नाम पर सचिवालय से शुरू हुआ पुनर्नियुक्ति का ये रोग आज विभागों, निदेशालयों से लेकर जनपद स्तर के कार्यालयों तक फैल चुका है। पिछली सरकार में करीब 200 अफसरों को पुनर्नियुक्ति दी गई।

पुनर्नियुक्ति का मामला दक्षता से जुड़ा है। जो सक्षम है, सरकार उनकी सेवाओं का लाभ लेगी, अब वह चाहे अफसर हों या कर्मचारी। जहां तक अफसरों को पुनर्नियुक्ति देने का प्रश्न है तो इसकी प्रमुख वजह अफसरों की कमी है। अप्रैल 2016 तक प्रदेश में राजपत्रित श्रेणी के सात हजार से ज्यादा पद खाली थे। जब तक इन पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है, सरकार को अनुभवी अफसरों की सेवाओं की जरूरत पड़ेगी। - मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता
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