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अधिकारी की चिट्ठी से सीएम आवास में हड़कंप

Tue, 12 Nov 2013 09:51 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में नेताओं के बीच शह-मात के खेल की डोर कहीं न कहीं नौकरशाहों के हाथों में भी है। ऊधमसिंहनगर से अनुसूचित जाति के एक अफसर द्वारा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ के खिलाफ सीएम को भेजी गई शिकायत इसका ताजा उदाहरण है। क्योंकि इस शिकायत में एक दो ब्यूरोक्रेट का भी हाथ है।
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मामला सीएम दरबार में
फिलहाल मामला सीएम दरबार में है। वैसे भी सीएम कार्यालय से इस तरह के मामलों का निस्तारण कम ही होता है। यदि ऐसा नहीं होता तो कमिश्नर कुमाऊं की डीएम यूएसनगर बीके संत के खिलाफ भेजी गई रिपोर्ट कुछ कार्रवाई हो गई होती।

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यूएसनगर में तैनात एक अफसर ने सीएम को भेजी चिट्ठी में कांग्रेस नेता तिलकराज बेहड़ पर जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित करने का आरोप लगाया है। पिछले दिनों यह वाकया सामने आया। सीएम ने चिट्ठी देखी तो नाराज भी हुए।
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यशपाल आर्य के चलते मामला ठंडे बस्ते में
तिलकराज बेहड़ से बात की तो कुछ चीजें स्पष्ट भी हुई। सूत्र बताते हैं कि सीएम ने इस प्रकरण को लेकर डीएम यूएसनगर को हटाने का निर्णय लिया। सीएम राजनीतिक व प्रशासनिक मामलों में इस जिले में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य को तवज्जो देते हैं। इसलिए आर्य की जिद के चलते बीके संत को हटाने का मामला ठंडे बस्ते में डालना पड़ा।

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वैसे भी कांग्रेस सरकार के गठन से ही जिले में आर्य व बेहड़ के बीच जो पावरगेम शुरू हुआ था वह अब ज्यादा तेज हो गया है। इस बात की पूरी संभावना है कि दोनों के बीच चल रहा शीत युद्ध जल्द ही सतह पर आएगा। इस पूरे प्रकरण में एक दो आईएएस भी धुरी बने हैं।

और, यह घटनाक्रम अंतिम तौर पर सीएम को ही सांसत में डालेगा। किरकिरी होने से बचाने के लिए सीएम ऑफिस इस मामले को दबाने की कोशिश में है।

पहले भी कई मामले सामने आए
- पिछले दिनों पीएमजीएसवाई को पीडब्लूडी में समायोजित करने का आइडिया भी एक ब्यूरोक्रेट का ही था। जिसे लेकर सीएम कैंप और ग्राम्य विकास मंत्री प्रीतम सिंह के बीच काफी तनाव रहा।
- आपदा प्रबंधन से विभागीय मंत्री को लगभग विरत कर देने वाली स्थिति भी एक पावरफुल ब्यूरोक्रेट की आइडियोलॉजी का नतीजा थी। क्योंकि अपने विभाग में हद से ज्यादा हस्तक्षेप से विभागीय मंत्री आर्य काफी नाराज रहे।
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- भाजपा सरकार में बीसी खंडूड़ी को हटाने की मुहिम की शुरूआत ही उनके सचिव रहे आईएएस प्रभात सारंगी के रवैये को लेकर शुरू हुई थी।

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