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डीएम ने कमिश्नर से कहा, पी रखी है तो क्या कर लोगे?

Fri, 23 Aug 2013 12:42 PM IST
अमर उजाला, अजित सिंह राठी, देहरादून
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उत्तराखंड में प्रशासनिक ढांचे पर सरकार के ढीले नियंत्रण के किस्से सामने आने लगे हैं। यूएसनगर के डीएम पिछले महीने तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर के साथ ऐसे पेश आए कि ब्यूरोक्रेसी में एक नई इबारत लिख दी गई।
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इस पूरे प्रकरण पर कमिश्नर की रिपोर्ट एक महीने से कार्रवाई के लिए सीएम के पास पड़ी है।

पी रखी है तो क्या?
घटना विगत 12 जुलाई की है। शाम करीब साढ़े नौ बजे कमिश्नर आरके सुधांशु ने डीएम यूएसनगर ब्रजेश संत को फोन किया। बातचीत में डीएम की जुबान लड़खड़ाई तो कमिश्नर ने टोका और कहा ऐसा प्रतीत होता है कि आपने अत्यधिक मात्रा में मादकद्रव्यों का सेवन किया है। इसे लेकर डीएम अपने कमिश्नर पर ही फट पड़े और कहा कि मैंने पी रखी है या नहीं पी रखी है इससे क्या हो जाएगा, अगर टेस्ट करवाना है तो टेस्ट करवा लो और पी भी रखी है तो क्या फर्क पड़ता है। बात बढ़ी तो कमिश्नर ने यह कहकर फोन काट दिया कि आप होशो हवाश में नहीं है, इसलिए बाद में बात होगी।

कमिश्नर की रिपोर्ट
यह डायलॉग कुमाऊं कमिश्नर की शासन को भेजी रिपोर्ट का हिस्सा है। हुआ यूं कि इसी दिन सुबह 11.47 बजे खटीमा विधायक पुष्कर सिंह धामी ने कमिश्नर से बात की और बताया कि डीएम यूएसनगर से बात हुई, ऐसा लग रहा है कि वें अपने होशो हवाश में नहीं है, उनकी जुबान लड़खड़ा रही है। इसके बाद कमिश्नर ने 12 बजे डीएम के मोबाईल नंबर पर कॉल किया लेकिन रिस्पांस नहीं मिला। लगभग पौने दो बजे यूएसनगर डीएम ऑफिस को नाराजगी के साथ सूचना भेजी गई। इसके बाद डीएम ने कॉल बैक किया और उपरोक्त डायलॉग दोनों आला अफसरों के बीच हुआ।
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कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में विधायक पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई शिकायत का जिक्र भी किया। इसके अलावा कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि विगत दो अक्टूबर को राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शहर में मौजूद होने के बावजूद डीएम ने गांधी जयंती के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।

अभी तक कोई कार्रवाई नहीं
राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने इस पर डीएम को छह अक्टूबर को नोटिस जारी किया। लेकिन कोई जवाब नहीं आया। बार-बार रिमाइंडर भेजने पर डीएम ने 25 अप्रैल 2013 को दिए गए स्पष्टीकरण में कहा कि अचानक दिल्ली में स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह दो अक्टूबर को जनपद में वापस नहीं लौट सके। उधर, कमिश्नर की 12 जुलाई की इस रिपोर्ट को 13 जुलाई को ही मुख्यमंत्री को भेज दिया गया। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होना हैरत में डालता है।
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