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बूढ़ी दिवाली: जौनसार बावर में शुरू हुआ पांच दिवसीय उत्सव, होला जलाकर हुई पर्व की शुरूआत

Wed, 23 Nov 2022 06:33 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, साहिया (देहरादून)

सार

Budhi Diwali 2022: देशभर में मनाई जाने वाली दिवाली के एक महीने बाद जौनसार बावर में बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है। पर्व की खास बात यह है कि इसमें क्षेत्र की लोक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिलती है।
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जौनसार में बूढ़ी दिवाली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जौनसार बावर जनजाति क्षेत्र में मनाई जाने वाली पांच दिवसीय जौनसारी दिवाली या बूढ़ी दिवाली की बुधवार को शुरूआत हो गई। पहले दिन गांवों में जश्न का वातावरण दिखाई दिया। गांवों में छोटे बच्चे व बड़े भीमल की लकड़ी से बनाई गई मशालों को जलाकर खुुशी मनाते  दिखाई दिए।

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देशभर में मनाई जाने वाली दिवाली के एक महीने बाद जौनसार बावर में बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है। पर्व की खास बात यह है कि इसमें क्षेत्र की लोक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिलती है। बुधवार से शुरू हुई दिवाली के पर्व के पहले दिन गांवों में भीमल की लकड़ी से बनाई गई मशाल जिसे स्थानी भाषा में होला कहा जाता है, जलाकर पर्व का आगाज किया गया।

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बताते चलें कि दिवाली की तैयारी पिछले सप्ताह से क्षेत्रवासी कर रहे थे। इस दौरान विशेष व्यंजन के रूप में धान को भिगोकर व उसे तलकर तैयार किया गया चिवड़ा प्रसाद के रूप में देवताओं केे समर्पित करने के साथ गांवों में वितरित किया गया।

होला जलाने की रस्म के बाद बच्चों ने नाचते गाते हुए गांव के पंचायती आंगन में पहुंचकर अपने-अपने इष्ट देवी देवताओं की प्रार्थना की। इसी क्रम में रातभर पंचायती आंगनों में हारुल नृत्य व लोक गीतों पर ग्रामीण थिरकते हुए पर्व की खुशियों को साझा करेंगे।

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बाजार में खरीदारों की भीड़

बूढ़ी दीपावली का पर्व पूरे जौनसार बावर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पर्व की तैयारियों के तहत की जाने वाली खरीदारी के लिए साहिया बाजार में ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट रही है।  क्षेत्रवासी जरूरत के हिसाब से मेवे, कपड़े व अन्य सामान की खरीदारी कर रहे हैं। स्थानीय निवासी चमन सिंह, आरएस चौहान, भारत चौहान, सुरेंद्र सिंह चौहान, चतर सिंह तोमर ने बताया कि दीपावली क्षेत्र का प्रमुख त्योहार है, जिसमें गांवों से बाहर व दूसरे शहरों और प्रदेशों में रह रहे सभी लोग शामिल होते हैं। जिसके चलते गांवों में पांच दिनों तक पूरी रौनक रहती है। उन्होंने बताया कि दीपावली का पर्व क्षेत्र के चार आराध्य देव महासू देवताओं को समर्पित रहता है।

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