वर्ष 2020-21 के लिए उत्तराखंड की विकास दर शून्य से 4.2 नीचे रहने का अनुमान है। प्रदेश सरकार यह भी मान रही है कि अगले साल इस विकास दर में खासा इजाफा होगा। फिस्कल रेस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) एक्ट के तहत प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई मध्यकालिक राजकोषीय नीति के अनुमान बता रहे हैं कि सरकार के सारे पूर्वानुमान ध्वस्त होते रहे हैं।
वर्ष 2019-20
- 22 करोड़ रुपये के राजस्व सरप्लस का अनुमान था। साल के अंत में 2136 करोड़ का राजस्व घाटा रहा।
- 78 प्रतिशत स्वयं का कर राजस्व ही हासिल कर पाई सरकार। 14736 करोड़ का अनुमान था। केवल 11513 करोड़ रुपये ही मिल पाए।
- 84 प्रतिशत राजस्व खर्च कर पाई सरकार
- 7657 करोड़ रहा राजकोषीय घाटा। सरकार ने 6798 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था।
बजट 2020-21
- शून्य से 4.2 प्रतिशत कम विकास दर रहने का है अनुमान
- 49.66 करोड़ रुपये राजस्व सरप्लस का अनुमान था। 3080 करोड़ रहा साल के अंत में राजस्व घाटा
- 78 प्रतिशत स्वयं का कर राजस्व ही हासिल कर पाई सरकार
- 94 प्रतिशत रहा राजस्व खर्च। पंजीगत खर्च बढ़ा दिया था सरकार ने
- 10802 करोड़ रहा राजकोषीय घाटा। 7549 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान था।
बजट 2021-22
- विकास दर 14 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- करीब 29 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे वेतन, पेंशन और ब्याज पर
- 12754 करोड़ रुपये का होगा स्वयं का कर राजस्व