वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने कार्यकाल का मंगलवार को चौथा बजट जारी किया। पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए आम बजट से आम लोगों को बड़ी उम्मीद थी।
लोगों को निराश किया
कोरोनाकाल में आर्थिक तंगी से जूझने वाले व्यापारियों को पैकेज के रूप में बूस्टर डोज मिलने की उम्मीद लगी थी। लेकिन बजट ने व्यापारियों एवं मध्यम वर्ग के लोगों को निराश किया है। उनका कहना है कि महंगाई रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। सरकार ने आम लोगों को सिर्फ झुनझुना थमाया है।
Budget 2022: विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया यह बजट निराशाजनक- हरीश रावत
बीते दो सालों से कोरोना का सर्वाधिक असर बाजार पर पड़ा है। व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। घर चलाना तक मुश्किल हो गया है। बजट से काफी उम्मीद थी, जो निराशा में बदल गई। सरकार ने कपड़े, चप्पल, जूते, हीरे की ज्वेलरी, खेती के सामान, मोबाइल एवं मोबाइल चार्जर पर जरूर कुछ हद तक टैक्स में कमी करने की घोषणा की है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
- अनिल झाम, व्यापारी
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आयकर स्लैब में बदलाव नहीं होने से नौकरीपेशा कर्मियों और व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। महंगाई के दौर में बड़ी उम्मीद थी कि आयकर छूट सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर 3.50 लाख होगी। साथ ही पांच लाख प्लस आयकर श्रेणी में आयकर की दर को दस फीसदी तक किए जाने की संभावना थी, जो अभी 20 फीसदी है। लेकिन निराशा हाथ लगी है।
- सुनील सेठी, व्यापारी
उत्तराखंड पर्यटन पर निर्भर है। कोरोनाकाल से पर्यटन, होटल और ट्रेवल व्यवसाय पूरी तरह ठप रहा। प्रदेश सरकार से किसी तरह की राहत नहीं मिली। ट्रैवल व्यवसाय से जुड़े लोग अपने वाहनों की किस्त तक जमा नहीं कर पाए। बावजूद सरकार ने किसी प्रकार की ब्याज में सब्सिडी की कोई घोषणा नहीं की।
- सुरेंद्र जैन, ट्रैवल व्यवसायी
400 वंदे भारत ट्रेन चलाने की घोषणा का स्वागत है। लेकिन सरकार को पहले से चलने वाली ट्रेनों में साफ-सफाई, खान-पान और दूसरी यात्री सुविधाओं की तरफ ध्यान देने की जरूरत है। वैसे भी सरकार ट्रेनों और स्टेशनों को पीपीपी मोड पर चलाने की योजना बना रही है। इससे फायदा चंद लोगों को होगा और फायदा आम आदमी को नहीं मिलेगा।
- केतन सहगल, व्यापारी