केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट के पिटारे से इस बार प्रदेश सरकार को केंद्रीय योजनाओं में अधिक मदद की दरकार है। मनरेगा, ग्राम सड़क योजना, सिंचाई योजना आदि में केंद्र सरकार ने बजट बढ़ाया तो राज्य को भी सीधा फायदा होगा।
प्रदेश सरकार के बजट का करीब 25 से 30 प्रतिशत तक केंद्रीय अनुदान का हिस्सा रहता आया है। केंद्रीय कोर सेक्टर की योजनाओं में तो सारा दारोमदार ही केंद्र पर रहता है। मसलन, कोरोना काल के दौरान ही ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और प्रवासियों के रोजगार का दारोमदार मनरेगा पर रहा। मनरेगा में प्रदेश का बजट करीब सात अरब का है। मनरेगा से राज्य में कई नई योजनाओं की शुरुआत सरकार ने की है। ऐसे में मनरेगा का बजट बढ़ता है तो राज्य को इसका सीधा फायदा होगा।
इसी तरह से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर भी प्रदेश सरकार की निगाह रहेगी। केंद्र सरकार से इस योजना में प्रदेश सरकार को वर्ष 2019-20 मेें मात्र 560 करोड़ रुपये मिले थे। इससे पहले के वर्ष में 3665 करोड़ रुपये का बजट था। केंद्र सरकार अगर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बजट बढ़ाती है तो राज्य को ग्रामीण सड़क निर्माण में फायदा होगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्रदेश सरकार को केंद्र से अभी तक करीब नौ हजार करोड़ रुपये मिले हैं जिसमें से पांच हजार करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं। इसी तरह से प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि का बजट बढ़ने की उम्मीद भी प्रदेश सरकार की ओर से की जा रही है। भारत नेट के तहत भी दो हजार करोड़ रुपये की योजना प्रदेश में शुरू की जा चुकी है।
करीब 45 योजनाएं हैं कोर सेक्टर में
द्रीय योजनाओं के कोर सेक्टर में करीब 45 योजनाएं हैं। इसमें भारत नेट, नमामि गंगे, किसानों के लिए फसली ऋण, खेलो इंडिया, उज्ज्वला, श्रमिक कल्याण, कला-संस्कृति विकास आदि शामिल हैं। इन योजनाओं के लिए केंद्र सरकार के स्तर से ही पैसा दिया जाता है।
कोर स्कीम में बजट बढ़ा तो होगा अधिक फायदा
कोर स्कीम में करीब 22 योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं में करीब 20 प्रतिशत तक राज्य सरकार को खर्च उठाना होता है। सीमांत क्षेत्र विकास योजना, आजीविका, अमृत योजना, पुलिस बल आधुनिकीकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, रोजगार आदि की योजनाएं इस वर्ग में शामिल हैं। कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ी मार से उबरने में इन योजनाओं की खासी भूमिका है। ऐसे में इन योजनाओं पर भी प्रदेश सरकार की खास नजर है। इसमें से कुुछ योजनाओं के लिए पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप मानक तय करने की मांग प्रदेश सरकार कर चुकी है।
डबल इंजन को अधिक मदद की दरकार
चुनावी वर्ष होने के कारण प्रदेश सरकार पर लोक लुभावन बजट का दबाव है। ऐसे में सेंट्रल स्पांसर और कोर सेक्टर की योजनाओं में अधिक पैसा मिलता है तो सरकार के लिए अपना प्लान का बजट बढ़ाना भी आसान हो जाएगा। इस समय करीब 11 हजार करोड़ रुपये प्रदेश सरकार विकास योजनाओं पर खर्च कर रही है।
सीएसएस में बजट बढ़ता है तो प्रदेश को अवस्थापना विकास से लेकर कल्याणकारी योजनाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने में आसानी होगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, मनरेगा आदि में उम्मीद की जा रही है कि बजट बढ़ेगा।
- अमित नेगी, सचिव वित्त