विलियम एगस्टस ने अपने सर्वे में लिखा है कि कुमाऊं के अल्मोड़ा-नैनीताल आदि इलाकों में उपलब्ध देवदार के पेड़ों से देवदार के तेल के साथ ही इसकी लकड़ी पानी के जहाज बनाने के काम आएगी। साथ ही इस रिपोर्ट में इस इलाके में उपलब्ध भांग के बीज के भी व्यवसायिक उपयोग की बात दर्ज है। इसके अलावा वनों में पाए जाने वाली अन्य चीजों का भी उल्लेख किया गया है जिसका ईस्ट इंडिया कंपनी व्यवसायिक उपयोग कर सकती है।
कुमाऊं और गढ़वाल में शासन करने के दौरान अंग्रेज यहां से देवदार और अन्य प्रजाति के हर साल लाखों पेड़ काटते और लकड़ी (गिल्टों) को नदियों में बहाकर पहाड़ों की तलहटी तक पहुंचाते थे। इसके बाद इन गिल्टों को रेलगाड़ी से बंदरगाहों तक ले जाते थे। बताया जाता है कि कुमाऊं की तलहटी काठगोदाम तक रेल लाइन का निर्माण अंग्रेजों ने मुख्य रूप से इसी मकसद से करवाया था।