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215 साल पुराने दुर्लभ दस्तावेज की सर्वे रिपोर्ट को ब्रिटिश लाइब्रेरी ने किया ऑनलाइन

Fri, 07 Dec 2018 08:40 AM IST
दीप जोशी/अमर उजाला, अल्मोड़ा
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ऑनलाइन किए गए दुर्लभ दस्तावेज
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देवदार के हरेभरे जंगलों से मुनाफा कमाने की चाह ही थी जिसकी वजह से अंग्रेजों के कदम कुमाऊं की ओर बढ़े थे। ब्रिटिश लाइब्रेरी की ओर से ऑनलाइन हुई अल्मोड़ा से संबंधित 215 साल पुरानी सर्वे रिपोर्ट का इशारा भी यही है।

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ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी विलियम अगस्टस ने जुलाई 1802 से जून 1804 के बीच यह सर्वे किया था। अगस्टस ने इस रिपोर्ट में अल्मोड़ा में बहुतायत में देवदार के पेड़ होने, देवदार की लकड़ी का पानी के जहाज के बनाने में उपयोगी होना, देवदार के तेल, भांग के व्यावसायिक उपयोग की संभावना आदि का उल्लेख किया है। 192 पेज की इस हस्तलिखित रिपोर्ट को ब्रिटिश लाइब्रेरी ने दुर्लभ दस्तावेज मानते हुए पांडुलिपि सेक्सन में अपलोड किया है।

अंग्रेजों ने अल्मोड़ा की सत्ता पर 1815 में कब्जा किया था। विलियम एगस्टस के इस सर्वे से यह भी पता लगता है कि कुमाऊं की सत्ता पर कब्जा करने से पहले ही ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी इस क्षेत्र के वनों के व्यवसायिक उपयोग का अध्ययन किया था। विलियम अगस्टस ने 24 फरवरी 1804 को रिपोर्ट बोर्ड ऑफ ट्रेड के अधिकारी को भेजी। 

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 लकड़ी नदियों में बहाकर मैदान में भेजते थे अंग्रेज  

विलियम एगस्टस ने अपने सर्वे में लिखा है कि कुमाऊं के अल्मोड़ा-नैनीताल आदि इलाकों में उपलब्ध देवदार के पेड़ों से देवदार के तेल के साथ ही इसकी लकड़ी पानी के जहाज बनाने के काम आएगी। साथ ही इस रिपोर्ट में इस इलाके में उपलब्ध भांग के बीज के भी व्यवसायिक उपयोग की बात दर्ज है। इसके अलावा वनों में पाए जाने वाली अन्य चीजों का भी उल्लेख किया गया है जिसका ईस्ट इंडिया कंपनी व्यवसायिक उपयोग कर सकती है। 

कुमाऊं और गढ़वाल में शासन करने के दौरान अंग्रेज यहां से देवदार और अन्य प्रजाति के हर साल लाखों पेड़ काटते और लकड़ी (गिल्टों) को नदियों में बहाकर पहाड़ों की तलहटी तक पहुंचाते थे। इसके बाद इन गिल्टों को रेलगाड़ी से बंदरगाहों तक ले जाते थे। बताया जाता है कि कुमाऊं की तलहटी काठगोदाम तक रेल लाइन का निर्माण अंग्रेजों ने मुख्य रूप से इसी मकसद से करवाया था।
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