पास में ही रहने वाले पनचक्की स्वामी ज्ञान चंद्र और जगदीश चंद्र ने बताया कि उनके पूर्वजों द्वारा वर्षों पूर्व संचालित पनचक्की घराट जो कि एकमात्र आजीविका का साधन है, बाढ़ प्रभावित होने के कारण बंद हो गया है। जिससे उनकी आर्थिकी प्रभावित हो गई है। लेकिन कोई भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
बंगाले गदेरे की बाढ़ से कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। आसपास के निवासी शोभन कुमार ,ज्ञान चन्द्र, जगदीश चंद्र, राजेश चन्द्र, बेताल सिंह, राय सिंह, नत्थी सिंह, देव सिंह ने सरकार और संबंधित विभाग से इस ओर ध्यान देने की मांग की है।
ताकि बड़ी हानि होने से पहले खतरे को कम किया जा सके। इधर, जिला गंगा सुरक्षा समिति सदस्य पर्यावरणविद विनोद जुगलान का कहना है कि वे इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई सुध लेने नहीं आया है।
आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। शीघ्र ही मौका मुआयना कर देखा जाएगा कि पानी से हो रहे कटाव के कारण पुल को कितनी क्षति पहुंची है। इसके बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी जाएगी।
- प्रवीण सक्सेना, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड डोईवाला