पीडब्लूडी की उपेक्षा कभी भी उत्तराखंड के चकराता-त्यूनी मार्ग पर सफर करने वालों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
देखरेख के अभाव में करीब एक दर्जन पुल जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। निर्माण के बाद से अब तक विभाग ने इन पुलों की सुध नहीं ली है। अस्सी के दशक में विभाग ने मोटर मार्ग पर करीब 18 पुलों का निर्माण कराया।
जिनमें से 12 पुल जर्जर हाल हो गए हैं। यह आलम तब है जब इस मार्ग पर जौनसार बाबर की सबसे अधिक आवाजाही होती है। दबी जुबान में विभागीय अधिकारी भी इन पुलों के जीर्णशीर्ण होने की बात स्वीकार रहे हैं। मगर कार्रवाई के नाम पर इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजने की बात कर रहे हैं।
जिला पंचायत सदस्य रमेश सिंह का कहना कि मार्ग पर सफर करते समय लोगों को अनहोनी की आशंका बनी रहती है। मार्ग से जुड़ी अधिकांश ग्राम पंचायतों के प्रधानों, बीडीसी मेंबर और जिला पंचायत सदस्यों का कहना है कि वे जर्जर पुलों की ओर कई बार ध्यान आकृष्ट करा चुके हैं।
मगर संबंधित विभाग मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। वर्ष 2010 के बाद क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से भी संवेदनशील बना है। ऐसे में पुल धराशायी होने पर जनता को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
अधिशासी अभियंता नवनीत पांडेय का कहना है कि 12 पुलों की मरम्मत के लिए इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है।
ये पुल हैं जर्जरहाल
रांठीक पुल, चांजोई पुल, हेडसू पुल, कुंआ पुल, दार्मिगाड़ पुल, चातरीगाड़ पुल, सावड़ा पुल, सीलीगाड़ पुल, अटाल पुल, मेंद्रथ पुल समेत एक दर्जन पुल देखरेख के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं।
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