ब्रेस्ट कैंसर को आमतौर पर बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन अब कम उम्र में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर ने बताया कि उत्तराखंड में महज 16 वर्ष की एक किशोरी में भी ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई है। यह मामला इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत की ओर इशारा है।
डॉ.प्रभाकर ने बताया कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर पहले 60-70 की उम्र में देखा जाता था, लेकिन बीते 25 वर्षों में यह 40-50 की उम्र में भी महिलाओं में सामने आने लगा है। इससे बचाव के लिए 35 की उम्र से ही स्क्रीनिंग साल में एक बार जरूर कराएं। किशोरावस्था में भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है, लेकिन यह बेहद दुर्लभ है। इस उम्र में स्तनों में होने वाली अधिकांश गांठें गैर-कैंसरकारी होती हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास देहरादून की सबसे कम उम्र महज 16 वर्ष की किशोरी में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई है। इसलिए लड़कियों को पीरियड्स शुरू होने के बाद से ही सावधान रहने की जरूरत है।
पेनलेस होती हैं कैंसर वाली गांठें
डॉ. सुमिता ने बताया कि 80 से 90 फीसदी गांठे नॉन कैंसरस होती हैं। 10 फीसदी गांठें ही कैंसर हो सकती हैं। दर्द रहित गांठ भी कैंसर का संकेत हो सकती हैं। इसलिए अगर गाठों में दर्द नहीं भी है तो भी उसकी जांच जरूर कराएं।
पीरियड्स के बाद जरूर करें खुद से जांच
डॉ. प्रभाकर ने बताया कि किशोरावस्था से ही पीरियड्स के बाद खुद से ब्रेस्ट जांच बेहद जरूरी है। यह खुद से जांच करने का सबसे सही समय होता है, क्योंकि इस समय स्तनों में सूजन कम होती है। इसके लिए देखें कि स्तन के आकार, रूप-रंग या साइज में कोई बदलाव तो नहीं है। त्वचा पर कोई गड्ढा, सिकुड़न, सूजन या लालिमा तो नहीं है।
पारिवारिक इतिहास नहीं, फिर भी हो सकता है खतरा
ब्रेस्ट कैंसर का खतरा उम्र, पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिक कारकों सहित विभिन्न कारणों से प्रभावित हो सकता है। परिवार में किसी को भी ये बीमारी नहीं है तो भी यह हो सकती है। इसलिए ब्रेस्ट में होने वाले बदलावों के प्रति सजग रहना और स्तन में किसी भी तरह के असामान्य बदलाव की जांच कराना जरूरी है।