इन 409 प्रोटीनों के अतिरिक्त 352 प्रोटीन सभी ग्रुपों में कॉमन थे। शोध टीम का नेतृत्व कर रहे आईआईटी रुड़की के जैव तकनीकी विभाग के प्रो. किरण अंबातीपुदी ने बताया कि स्तन और ओवरी कैंसर की प्रवृति असमान और लक्षण रहित होने की वजह से मैमोग्राफी, कलर-फ्लो डॉप्लर इमेजिंग से ब्लड फ्लो पैटर्न और ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड परीक्षण से इन बीमारियों को जल्द पता लगना कठिन होता है।
उन्होंने बताया कि हालांकि इन प्रोटीनों का बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के लिए क्लिनिकल सत्यापन होना अनिवार्य है, पर वर्तमान अध्ययन के परिणाम लार से क्लिनिकल जांच की प्रक्रिया विकसित करने की दिशा में पहला कदम है।
यह शोध एफएएसईबी बायो एडवांसेज नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें शरीर के तरल स्वरूप संपूर्ण लार के इस्तेमाल से स्तन और ओवरी कैंसर का जल्द पता लगाने के बारे में जानकारी दी गई है।