भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बार्डर आउटपोस्ट तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2015 में 135 किमी लंबे टीजे मार्ग को मंजूरी दी थी, लेकिन प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की अंतिम स्थिति साफ नहीं होने से रोड को जौलजीबी के बजाय ठुलीगाड़ से रूपालीगाड़ (42.275 किमी) तक ही स्वीकृत किया गया।
इस 42.275 किमी मार्ग पर भी साढ़े तीन साल बाद सिर्फ 20 किमी मार्ग की ही कटिंग हो सकी है। रोड बनने से बीओपी तक मजबूत आधारभूत ढांचा बनने के साथ नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी में सुगमता आती।
सीमा सुरक्षा के लिए इस इलाके में चंपावत और पिथौरागढ़ जिले की एसएसबी की 34 बीओपी में से रोड से कटी 19 बीओपी की सुविधा में इजाफा होता। इस वजह से यहां जरूरी सामग्री पहुंचाने में देरी और लागत भी ज्यादा आती है।
ब्रिडकुल के परियोजना प्रबंधक गंभीर सिंह का कहना है कि अनुबंध की शर्तो को लेकर हुए विवाद से पुल का काम शुरू नहीं हो सका। पुल के काम को जल्द शुरू कराने के लिए विभाग हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।
टीजे रोड सामरिक महत्व की है, इन दिनों नेपाल से रिश्तों की गरमाहट में भी कमी आई है। मगर देश की सुरक्षा के लिए इतनी अहम सड़क को लेकर कार्यदाई संस्था का नजरिया तेजी से काम को आगे बढ़ाने का नहीं है। ये कहना है इस रोड को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का।
कहते हैं कि ठुलीगाड़ से चूका तक के पहले चरण के काम में किसी तरह की न कोई अड़चन थी और न विवाद, मगर ये काम भी तीन साल में पूरा नहीं हो सका। आरोप लगाया कि चूका से रूपालीगाड़ तक के दूसरे पैकेज की टेंडरिंग में विभागीय मिलीभगत आड़े आ रही है। विभाग अपनी अक्षमता और री-टेंडरिंग में देरी को विवाद की आड़ में छुपा रहा है।
फर्त्याल ने कहा कि चूका और रूपालीगाड़ को जोड़ने वाले पुल को बनाने में ब्रिडकुल बेवजह देरी कर रहा है। इस पुल के निर्माण के बगैर आगे की रोड का कोई मतलब नहीं है। विधायक ने कहा कि देश की सुरक्षा व ग्रामीणों की सुविधा के मद्देनजर इस सड़क का गुणवत्ता के साथ जल्द निर्माण करने और काम में गड़बड़ियों को लेकर सदन में भी प्रमुखता से आवाज उठाई जाएगी।