मुंबई से दुबई की दूरी उत्तराखंड की तुलना में भले ही कई गुना ज्यादा हो, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री को यह बेहद कम लगती है। मुंबई से दून पहुंचने में ज्यादा समय के साथ ही किराया भी अधिक देना पड़ता है। यही कारण है कि बॉलीवुड के फिल्मकार शूटिंग के लिए दून के बजाय ओवरसीज को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। यह कहना है उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के उपाध्यक्ष बनाए गए सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया का।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले इस समस्या का समाधान खोजना होगा। बड़े कलाकारों को किसी नई लोकेशन पर शूटिंग के लिए मनाना वैसे ही मुश्किल होता है। ऐसे में अगर फ्लाइट का इंतजार करना पड़े तो दिक्कतें बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड के रहने वाले हैं। लिहाजा अपनी फिल्मों की शूटिंग में उत्तराखंड को प्राथमिकता देते हैं।
राग-देश की भी शूटिंग होगी उत्तराखंड में
तिगमांशु धूलिया
पान सिंह तोमर और यारा की शूटिंग के बाद वह जल्द ही राग-देश की शूटिंग भी यहीं करेंगे। तिग्मांशु धूलिया ने बताया कि देवभूमि से अपने प्यार के चलते उन्होंने यहां शूटिंग का फैसला किया। हालांकि, इससे उनकी फिल्म का बजट काफी बिगड़ गया। उन्होंने कहा कि फिल्म पॉलिसी को लेकर उनकी सरकार से बात हुई है। अब बतौर उपाध्यक्ष वह फिल्म उद्योग की बेहतरी के लिए काम करेंगे।
तिग्मांशु ने कहा कि प्रदेश में फिल्म विकास के लिए फिल्म इंस्टीट्यूट और पिक्चर हॉल खुलने बहुत जरूरी हैं। बतौर उपाध्यक्ष वह इस क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर काम करेंगे।
फिल्म उद्योग होगा मजबूत: हेमंत पांडे
हेमंत पांडे
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परिषद में उपाध्यक्ष बनाए गए हेमंत पांडे ने कहा कि परिषद के गठन से आंचलिक सिनेमा की दिक्कतों को दूर करने में लाभ मिलेगा। राज्य गठन के समय से ही परिषद की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब परिषद के गठन के बाद कलाकार और फिल्म उद्योग से जुड़े लोग उम्मीद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वह चार सितंबर को दून पहुंच रहे हैं। उसके बाद वह इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत करेंगे। प्रदेश में फिल्म निर्माण के लिए अवस्थापना विकास, शूटिंग स्थलों का निर्माण, फिल्म निर्माण और प्रदर्शन के जरिये रोजगार व पर्यटन को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने और निजी क्षेत्र के पूंजी निवेश को आकर्षक बनाने के लिए परिषद का गठन किया गया है।