राजधानी देहरादून के ब्लड बैंकों में खून का संकट एक बार फिर गहरा गया है। दून अस्पताल ब्लड बैंक में केवल आठ यूनिट खून बाकी रह गया है। वहीं, प्राइवेट ब्लड बैंकों में भी सामान्य स्टॉक का दसवां हिस्सा ही बचा हुआ है। स्थिति नहीं बदली तो जरूरतमंदों को खून की कमी से जूझना पड़ सकता है।
कोरोना के कारण इन दिनों रक्तदान के शिविर बेहद कम आयोजित हो रहे हैं। शिविरों और ब्लड बैंक में लोग रक्तदान करने में बेहद कतरा भी रहे हैं। विशेषकर इस समय स्कूल कॉलेजों में रक्तदान शिविर आयोजित होते थे, जिनमें बड़ी संख्या में रक्त एकत्र होता था। लेकिन इस साल कोरोना के कारण सब कुछ बंद हैं। सामाजिक संस्थाएं और स्वैच्छिक रक्तदाता भी रक्तदान नहीं कर रहे हैं। इससे ब्लड बैंकों में एक बार फिर खून का स्टॉक खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है।
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल दून के ब्लड बैंक की हालत सबसे ज्यादा खराब है, जहां केवल आठ यूनिट खून शेष है। वहीं, आईएमए ब्लड बैंक और श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल ब्लड बैंक में भी 100 से 120 यूनिट ही खून बचा हुआ है। दोनों ब्लड बैंकों में इस समय सामान्य तौर पर एक से डेढ़ हजार यूनिट खून का स्टॉक रहता था।
दून अस्पताल के नाम से लोग वैसे भी घबरा रहे हैं। खून लेने वाले रिप्लेसमेंट तक देने को तैयार नहीं हैं। इससे ब्लड बैंक में दिक्कत बढ़ गई है।
-डा. शशि उप्रेती, प्रभारी, दून ब्लड बैंक
स्कूल-कॉलेज खुले रहने पर इस समय सबसे ज्यादा ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित होते थे। लेकिन कोरोना के कारण सब बंद है।
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अमित चंद्रा, समन्वयक, एसएमआई ब्लड बैंक
बड़े कैंप बिल्कुल बंद हो गए हैं। छोटे-छोटे कैंप भी मुश्किल से हो रहे हैं। स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करने वाले भी बच रहे हैं।
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कमल साहू, समन्वयक, आईएमए ब्लड बैंक