प्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक ब्लैक फंगस के कुल 55 मरीज मिले हैं। इसमें सात मरीजों की मौत हुई है। देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 53 मरीज ब्लैक फंगस संक्रमण से ग्रसित हैं।
सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार तक देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में ब्लैक फंगस के कुल 55 मरीज है। इसमें देहरादून जिले में 53, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले में एक-एक मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है।
वहीं देहरादून जिले में पांच मरीजों की मौत हुई है। नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले में एक-एक मरीज की मौत हुई है। शनिवार को देहरादून जिले में पांच मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। जबकि छह संदिग्ध मरीज हैं। एक मरीज की मौत हुई है।
ब्लैक फंगस के उपचार को लेकर देहरादून जिला प्रशासन जिले के अस्पतालों के लिए सामान्य दिशा निर्देश जारी करेगा। एडीएम प्रोटोकॉल गिरीशचंद्र गुणवंत को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे प्रमुख डॉक्टरों से बातचीत कर सभी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन तैयार करेंगे। शनिवार को अधिकारियों की ऑनलाइन बैठक लेते हुए कोविड प्रभारी मंत्री गणेश जोशी ने इसके निर्देश दिए।
शनिवार को उन्होंने दून अस्पताल, मैक्स, श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल, सिनर्जी, सुभारती, कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों से ब्लैक फंगस को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा ब्लैक फंगस के उपचार को लेकर शासन प्रशासन अस्पतालों को पूरा सहयोग देगा। सभी अस्पताल अपने मेडिकल स्टाफ को ब्लैक फंगस के इलाज, मरीज को उपचार देने के तौर तरीके और बरती जाने वाली सावधानियों की अनिवार्य तौर पर जानकारी दें।
सभी अस्पताल बेहतर उपचार और उसके बेहतर परिणाम को एक-दूसरे से साझा करें। प्रभारी मंत्री ने अस्पतालों को संक्रमण की रोकथाम के लिए उपचार की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए अभी से व्यवस्था बनानी शुरू कर दें।
जंक फूड व बासी फल-सब्जियों को कहें न
डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस और उसके उपयोग को लेकर जानकारियां साझा की। उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर शुद्ध आक्सीजन लें। अपने आसपास साफ-सफाई रखें। दांत साफ रखें और नमक व फिटकरी का कुल्ला करें। ठंडा व जंक फूड न लें। सड़े-गले फल, सब्जी ना खाएं। सब्जियों को आजकल कच्चा न खाएं। उन्होंने कहा कि कई एंटीबायटिक व अन्य दवाओं से हमारे शरीर के अच्छे बैक्टीरिया भी मर जाते हैं। इसलिए खाने में दही को नियमित तौर पर शामिल करें।
ब्लैक फंगस से निपटने के लिए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के सात विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है। साथ ही दून अस्पताल के आई वार्ड को ब्लैक फंगस वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. नारायणजीत सिंह की अगुवाई में विशेषज्ञों की सात सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।
टीम में ईएनटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास सिकरवार, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निधि नेगी, नेत्ररोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा, चर्मरोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्रुति बरनवाल, सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. डीपी तिवारी व दंतरोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकुर जोशी को शामिल किया गया है।
डॉ. सयाना के अनुसार ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज के इलाज में नेत्ररोग, दंतरोग, सर्जन, मेडिसिन, चर्मरोग आदि विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में टीम गठन के बाद इलाज में तमाम सहूलियतें होंगी। कोरोना, ब्लैक फंगस बीमारी से पीड़ित मरीजों के इलाज को लेकर हर संभव कदम उठाए गए हैं।
आई वार्ड को ब्लैक फंगस वार्ड में किया गया तब्दील
नेत्ररोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा ने बताया कि विभाग के आई वार्ड को ब्लैक फंगस वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। ब्लैक फंगस बीमारी से पीड़ित सभी मरीजों को इसी वार्ड में भर्ती किया जाएगा। डॉ. ओझा का कहना है कि ब्लैक फंगस को लेकर लोगों को बहुत अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। यह बीमारी बहुत पहले से है और इसका इलाज संभव है। जरूरत है कि समय रहते इसकी जांच कराएं।
केंद्र सरकार ने राज्य को केवल 50 इंजेक्शन भेजे थे, जिन्हें गढ़वाल और कुमाऊं भेज दिया गया है। इस बीच राज्य में ब्लैक फंगस के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
राज्य सरकार से मिली सूचना के मुताबिक, वर्तमान में राज्य में 55 लोगों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। सात रोगियों की जान चुकी है जबकि पांच लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि राज्य में इस बीमारी के इंजेक्शन का कोटा खत्म हो चुका है। इंजेक्शन की मांग को लेकर अब विरोध भी शुरू हो गया है। विपक्ष ने इस मामले में अधिकारियों का घेराव भी किया।
राज्य में उत्पादन पर सरकार की उम्मीदें
प्रदेश सरकार की उम्मीद उन दो कंपनियों पर टिकी है, जिन्हें राज्य में ही ब्लैक फंगस की दवा का उत्पादन करने का जिम्मा दिया गया है। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल के मुताबिक, केंद्र सरकार से जल्द इंजेक्शन प्राप्त हो जाएंगे। इसके साथ केंद्र सरकार की अनुमति प्राप्त होते ही दो कंपनियों में जल्द इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा। केंद्रीय टीम निरीक्षण करके चली गई है।
केंद्र सरकार से ब्लैक फंगस के इलाज के लिए 400 इंजेक्शन की डिमांड भेजी गई थी। 50 इंजेक्शन प्राप्त हुए। जिन्हें कुमाऊं व गढ़वाल भेजा गया है। अब 350 इंजेक्शन आने हैं। जैसे-जैसे इंजेक्शन आएंगे, उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।
- डॉ. तृप्ति बहुगुणा, स्वास्थ्य महानिदेशक