यूपी के बाद अब उत्तराखंड में भी निकाय चुनाव में भगवा लहराने के लिए मोदी ब्रिगेड ने ताकत झोंक दी है।
त्रिवेंद्र सरकार के सामने अब सबसे पहला और अहम चुनाव नगर निकायों का है। इसलिए उसकी संगठनात्मक गतिविधियों की जगह भले ही अलग-अलग हों, लेकिन चुनावी चिंता सिर्फ एक है।
2019 के लोकसभा चुनाव में उतरने से पहले 2018 के निकाय चुनाव में भगवा लहर बिखेरने के लिए पार्टी अब किसी भी स्तर पर जाने के लिए तैयार है। खास तौर पर यूपी में प्रचंड बहुमत की सरकार के बाद निकायों में जिस तरह से भगवा परचम लहराया है, उत्तराखंड में पार्टी के लिए वैसा ही कुछ करके दिखाने की चुनौती है। इसलिए हल्द्वानी में जुटा भाजपा परिवार निकाय चुनाव से हटकर किसी और मुद्दे को प्राथमिकता देगा, ऐसा नहीं माना जा सकता।
नौ महीने के कार्यकाल में नगर निकाय की राजनीति में भाजपा सरकार ने जमकर काम किया है। 42 नगर निकायों में सीमा विस्तार का फैसला छोटा नहीं माना जा सकता। उन स्थितियों में जबकि पंचायत प्रतिनिधियों और कांग्रेस ने मिलकर विरोध किया है। इसके अलावा, दो नए नगर निगम कोटद्वार और ऋषिकेश की उपलब्धि को भी भाजपा निकाय चुनाव में भुनाना चाहती है।