उत्तराखंड में सरकार बनाने के सवाल पर भारतीय जनता पार्टी में उच्च स्तर पर सहमति बन गई है। सरकार के भावी स्वरूप, मुख्यमंत्री पद, समर्थन देने वाले विधायकों और पार्टियों की भूमिका जैसे सवालों पर मंथन का सिलसिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा के बाद स्वदेश वापसी के बाद शुरू होगा।
दरअसल, भाजपा नहीं चाहती कि राज्य में लगाए गए राष्ट्रपति शासन पर संसद की सहमति लेने की प्रक्रिया अपनानी पड़े। पार्टी के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है, इसलिए 25 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण से पहले ही सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस बीच राज्य में लगाए गए राष्ट्रपति शासन और कांग्रेस के बागी विधायकों की सदस्यता पर अदालत भी अपना रुख साफ कर चुका होगा। इसके अलावा इसी दौरान पार्टी के रणनीतिकार कांग्रेस के इतर अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों का मन टटोल चुके होंगे। इस बीच पार्टी को उम्मीद है कि सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होने पर कांग्रेस के सतपाल महाराज खेमे के माने जाने वाले आधा दर्जन विधायक भी बगावत की राह पकड़ेंगे।
सरकार नहीं बनाने पर होगी भाजपा को मुश्किल
नरेंद्र मोदी
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पार्टी के अतिविशिष्ट सूत्र ने बताया कि पार्टी उत्तराखंड में अपनी अगुवाई में सरकार बनाएगी। सरकार नहीं बनाने पर राज्य में लगाए गए राष्ट्रपति शासन के लिए संसद की सहमति हासिल करनी होगी। राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। इसके अलावा एकजुट विपक्ष पहले से ही सरकार को इस मुद्दे पर उच्च सदन में पटखनी देने के मूड में है।
इसलिए पार्टी के पास सरकार बनाने के अलावा कोई चारा नहीं है। अगर सत्र का दूसरा चरण शुरू होने से पहले ही राज्य में नई सरकार का गठन हो गया तो राष्ट्रपति शासन पर संसद की सहमति हासिल करने की मजबूरी खत्म हो जाएगी।
गौरतलब है कि पीएम मोदी 30 मार्च से 3 अप्रैल तक बेल्जियम, अमेरिका और सऊदी अरब की यात्रा पर होंगे। पीएम मोदी 4 अप्रैल को स्वदेश लौटेंगे। इसके बाद भावी सरकार के गठन की रूपरेखा तय होगी।
टूटेंगे सतपाल समर्थक कांग्रेस विधायक!
सतपाल महाराज
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भाजपा सूत्रों की मानें तो सरकार गठन का सिलसिला शुरू होने पर कांग्रेस के कम से कम आधा दर्जन और विधायक पार्टी से बगावत करेंगे। ये विधायक लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामने वाले नेता सतपाल महाराज के खेमे के माने जाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि जब कांग्रेस के 9 विधायक टूटे थे, तब इन विधायकों ने भी बगावत करने पर हामी भर ली थी। इन्हें कांग्रेस नेतृत्व मनाने में सफल रहा था। पार्टी सूत्रों का दावा है कि ये विधायक जरूरत पड़ने पर भाजपा के साथ आएंगे। इसके अलावा पार्टी की बसपा, निर्दलीय और यूकेडी विधायकों पर भी नजर है।