उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को डोईवाला में खुली चुनौती दे रहे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की परेशानी में ही इजाफा हो गया है।
ढैंचा बीज प्रकरण में जांच आयोग ने त्रिवेंद्र को भी निशाने पर लिया है। ढैंचा बीज खरीद के प्रकरण के समय त्रिवेंद्र रावत भाजपा सरकार में कृषि मंत्री थे और बीज खरीद में तत्कालीन कृषि मंत्री की भी सहमति थी।
त्रिपाठी जांच आयोग की ओर से सरकार को सौंपी गई ढैंचा बीज प्रकरण की रिपोर्ट में त्रिवेंद्र रावत पर सीधे-सीधे सवाल उठाए गए हैं।
रावत की अनदेखी और चूक से हुआ घोटाला
आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्ष में साफ कहा गया है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ढैंचा बीज खरीद के मामले में अपने दायित्व की अनदेखी की और उनकी इस चूक का ही परिणाम रहा कि यह घोटाला हो पाया।
आयोग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन कृषि मंत्री त्रिवेंद्र रावत ने खरीफ 2010 में कृषि निदेशक के ढैंचा बीज प्रस्ताव को बिना नियमों और प्रक्रिया का पालन किए हुए अनुमोदित कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक ढैंचा बीज की अनियमितताओं की रिपोर्ट आने के बाद कृषि सचिव की संस्तुति पर पहले तो नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंहनगर के मुख्य कृषि अधिकारियों के निलंबन के आदेश पारित कर दिए गए पर बाद में बिना कोई कारण बताए यह आदेश बदल कर केवल विभागीय कार्यवाही तक सीमित कर दिया गया।
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 के दायरे में रावत
ऐसे में आयोग ने माना है कि इससे यह साबित हो रहा है कि तत्कालीन कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की चूक और कृत्य के कारण ढैंचा बीज घोटाला संभव हो पाया।
आयोग ने माना है कि इन मामलों को देखते हुए तत्कालीन कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 के दायरे में आते हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत को दे रहे हैं चुनौती
तत्कालीन कृषि मंत्री ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के शासकीय दायित्व का निर्वहन नहीं किया। त्रिपाठी जांच आयोग की यह रिपोर्ट साफ है कि त्रिवेंद्र रावत के लिए खासी मुसीबत खड़ी करेगी।
खासकर अब जबकि त्रिवेंद्र रावत डोईवाला सीट पूर्व मुख्यमंत्री निशंक के सांसद बनने के बाद खाली हो चुकी है और यहां निकट भविष्य में चुनाव होना है।
रावत खुद भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं ओर मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दे रहे हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
यह भी सिद्ध है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के चूक और कृत्य के कारण कृषि निदेशक अनियमितताएं कर पाए तथा एक आपराधिक षड़यंत्र रचकर उसका लाभ उठा पाए।
रावत अपने कर्तव्य और दायित्वों के निर्वहन में असफल पाए गए। उनके कृत्य और चूक से एक प्राइवेट फर्म निधी सीड कारपारेशन को लाभ पहुंचा जो लोकहित के विपरीत था।
इससे त्रिवेंद्र सिंह रावत भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 की धारा 13 की परिधि में आते हैं।