‘मैं 24 वर्ष का था। सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर घर लौट आया था। मेरी जेब में मात्र 300 रुपये थे। मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं?
माताजी ने मेरी उदास आंखों को न सिर्फ पढ़ लिया बल्कि अपनी बचत की जमा पूंजी मेरे हाथों में थमा दी कि मैं कोई व्यवसाय कर लूं। माताजी से जुड़ी जीवन की उस घटना को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।’
यह प्रेरणादायक संस्मरण वित्त मंत्री प्रकाश पंत के जीवन से जुड़ा है। मदर्स डे के बहाने ‘अमर उजाला’ ने जब उनकी माताजी से जुड़ी यादों के तार छेड़े तो उन्हें जीवन का वह कठिन दौर याद आ गया, जिसमें मां संबल बनकर उनके साथ खड़ी हो गईं थी।