यह है मामला
वर्ष 2015-16 में नगर पंचायत शक्तिगढ़ में राजीव गांधी आवास योजना के तहत 504 आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें मौके पर सिर्फ 298 आवासों का कार्य ही शुरू किया गया था। पहली किस्त के रूप में लाभार्थियों के लिए स्टेट बैंक के खाते में 11 करोड़ रुपये जारी हुए थे। मामले की गड़बड़ी को लेकर शक्तिफार्म निवासी प्रेम कुमार अरोरा और रमेश राय ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की थी। दोनों याचियों ने अपनी पीआईएल में आरोप लगाया था कि राजीव आवास योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों को नहीं दिया गया है और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया था। याचिकाकर्ता प्रेम कुमार के मुताबिक योजना के तहत अपात्र लोगों का चयन किया गया। वहीं योजना के तहत मिलने वाली धनराशि लाभार्थियों के बैंक खाते में आनी थी लेकिन ठेकेदारों ने बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन प्रबंधक के साथ साठगांठ कर अपने खाते में अवमुक्त करा लिए थे।
डीएम की जांच में ये लोग पाए गए थे दोषी
डीएम डॉ. नीरज खैरवाल की जांच में करोड़ों रुपये के राजीव आवास घोटाले में भाजपा नेता/ नगर पंचायत चेयरमैन सुक्रांत ब्रह्म, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी जयवीर सिंह राठी, वर्तमान अधिशासी अधिकारी सरिता राणा, वर्तमान लिपिक सुरेश सिंह बाबू, तत्कालीन अवर अभियंता रावेंद्र पाल सिंह, वार्ड 1 सभासद शगुन गुप्ता, वार्ड 2 सभासद उप्रेंद्र सिंह, वार्ड 3 सभासद मीना सरकार, वार्ड 4 सभासद काला चांद दास, संजीव गुप्ता, ठेकेदार कैलाश चंद्र माहेश्वरी, ठेकेदार रमेश मिश्रा, ठेकेदार जसविंदर सिंह, ठेकेदार सुनील अरोरा, ठेकेदार हरविलास, ठेकेदार अशोक कुमार, बैंक ऑफ बढ़ौदा के तत्कालीन मैनेजर सिद्धार्थ कुमार दोषी पाए गए थे।
10.84 करोड़ के राजीव आवास घोटाले में प्रथमदृष्टया 17 लोग दोषी पाए गए थे। कानूनी कार्रवाई के लिए जिला शासकीय अधिवक्ता की राय मांगी गई थी। शासकीय अधिवक्ता की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। रिपोर्ट का अध्ययन कर जल्द ही सभी दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. नीरज खैरवाल, डीएम यूएस नगर