उत्तराखंड की राजनीति में पिछले दिनों सियासी उथल-पुथल के दौर में भाजपा का हर दांव विफल होता दिखा। फ्लोर टेस्ट से लेकर राज्यसभा के चुनाव में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी।
फ्लोर टेस्ट से पहले कांग्रेस के दस विधायक अपने पाले में मिलाने के बाद भी हरीश रावत सरकार नहीं डगमगाई। राज्यसभा चुनाव में तो कांग्रेस ने भाजपा का एक विधायक ही नहीं बल्कि अघोषित पार्टी प्रत्याशी भी झटक लिया। कांग्रेस के हाथों दूसरी बार सियासी मात ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए। पार्टी कैडर में चर्चा है कि अजय भट्ट के पास नेता प्रतिपक्ष के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी है, लेकिन पलड़ा कांग्रेस का भारी हो रहा है।
हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए दस पूर्व विधायकों को संगठन से सहयोग न मिलने के अलावा कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका तय नहीं होने जैसे सवाल भट्ट के सामने खड़े हैं। इन्हीं सियासी मुद्दों पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने अमर उजाला संवाददाता कृष्णेंदु कुमार से बातचीत में पार्टी लाइन के साथ अपनी भूमिका को स्पष्ट किया।
- आपके बारे में कहा जाता है कि आप प्रतिपक्ष के नेता की जगह हरीश रावत के दोस्त ज्यादा नजर आते हैं। प्रदेश में भाजपा की भूमिका मित्र विपक्ष के रूप में है ?
चाहे आपदा का मामला हो, नारी निकेतन का मामला, चावल घोटाला या फिर आबकारी नीति का इन सभी मुद्दों पर हमने सरकार को घेरा है। कोई ऐसा मुद्दा नहीं रहा है, जहां हमारा रुख नरम रहा हो। अगर यह मुख्यमंत्री के करीबी होने का प्रमाण है तो ऐसा करीबी सबको होना चाहिए। विपक्ष के कुछ लोग हैं, जो इस तरह की बात करते रहते हैं कि मैं मुख्यमंत्री का करीबी हूं। वह चाहते हैं कि मैं डंडा उठाऊं और हरीश रावत के सिर पर मार दूं। तो क्या मैं हरीश रावत के सिर पर डंडा मार दूं? लोकतंत्र में ये संभव नहीं है। लोकतांत्रिक तरीके से हम सरकार को हर मुद्दे पर घेरते हैं और घेरेंगे।
-आपके बारे में यह भी कहा जाता है कि आप मोहग्रस्त नेता हैं। आपके पास नेता प्रतिपक्ष के साथ-साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी है। दो-दो पद होने की वजह से आप दोनों काम ठीक तरीके से नहीं कर पा रहे हैं। आप एक पद छोड़ क्यों नहीं देते?
मैंने पार्टी से कभी कुछ नहीं मांगा। मैंने तो यह भी नहीं कहा मुझे नेता प्रतिपक्ष बनाओ या पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाओ। न ही इसको लेकर मैंने कभी लाबिंग की। मैंने तो पार्टी से कभी टिकट तक नहीं मांगा। पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका निर्वहन कर रहा हूं। पार्टी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद मैंने राष्ट्रीय नेतृत्व को अवगत करा दिया था कि एक पद कम होना चाहिए। पार्टी ने अगले आदेश तक दोनों पदों पर बने रहने का आदेश दिया है। जिस दिन पार्टी का आदेश होगा, एक मिनट में पद छोड़ दूंगा।
-फ्लोर टेस्ट से लेकर राज्यसभा के चुनाव तक भाजपा की रणनीति फेल रही। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? प्रदेश नेतृत्व यानि आप या राष्ट्रीय नेतृत्व?
हमारी रणनीति फेल साबित नहीं हुई है। 18 मार्च को हमने विनियोग बिल पर मत विभाजन का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस के नौ विधायक हमारे साथ आ गए। विधानसभा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र का गला घोंटा। आज भी हरीश रावत की सरकार जुगाड़ से चल रही है। हमें कोई नुकसान नहीं हुआ। हम तो फायदे में ही रहे। दस विधायक हमारे पास आ गए। दस विधायक कांग्रेस के टूटे तो नुकसान किसका हुआ? राज्यसभा चुनाव में हमारे पास संख्या बल नहीं था, हमने निर्दलीय को समर्थन देने की बात कही थी। अगर जिम्मेदारी की बात है तो सिर्फ और सिर्फ अजय भट्ट इसके लिए जिम्मेदार हैं।