उत्तराखंड में राज्यसभा की खाली हो रही सीट को लेकर भाजपा अभी वेट एंड वाच की स्थिति में है। विधानसभा सदस्यों की संख्या के आधार पर भाजपा इस स्थिति में नहीं है कि अपने दम पर किसी को उच्च सदन में भेज सके। ऐसे में भाजपा की नजर पीडीएफ की गतिविधियों पर लगी है।
भाजपा किसी को समर्थन देने और किसी से समर्थन लेने के साथ चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारने के विकल्प पर विचार कर रही है। विधानसभा में अभी भाजपा के विधायकों की संख्या (बागी विधायकों को छोड़कर) 28 है। राज्यसभा में किसी को भेजने के लिए भाजपा को चार-पांच विधायकों के समर्थन की और जरूरत पड़ेगी।
प्रदेश में राज्यसभा की खाली हो रही एक सीट पर 11 जून को मतदान होना है। इसके लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है। राज्यसभा चुनाव को लेकर अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वर्तमान में उत्तराखंड के विधानसभा की जो स्थिति है उसमें 62 विधायक हैं (बागी विधायकों को छोड़कर)।
फ्लोर टेस्ट में पाला बदलने वाले भाजपा व कांग्रेस के एक-एक विधायकों की सदस्यता पर भी तलवार लटक रही है। अगर इन दोनों की सदस्यता रद्द हो जाती है तो विधानसभा में विधायकों की स्थिति 60 हो जाएगी।
ऐसी स्थिति में भी भाजपा अकेले अपने दम पर किसी को राज्यसभा में भेजने की स्थिति में नहीं होगी। उसे कम से कम चार-पांच विधायकों के समर्थन की और आवश्यकता होगी। पीडीएफ राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने की बात कर रही है। इसको लेकर कांग्रेस ने भी अपनी स्थिति साफ नहीं की है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर अभी हमने कुछ तय नहीं किया है। वैसे हमारी ओर से सभी विकल्प खुले हुए हैं। चुनाव लड़ने, समर्थन देने और समर्थन लेने सहित सभी मुद्दों पर विचार किया जा रहा है।