चाइल्ड फाउंडेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) ने देहरादून के करीब दस से अधिक बाल आश्रमों की गोपनीय तरीके से जांच की। यह टीम लखनऊ से आई थी। खबर है कि सीएफआई को दून के बाल आश्रमों से बच्चों की तस्करी की शिकायत मिली थी। टीम को बाल तस्करी के संबंध में क्या सुबूत मिले यह तो पता नहीं चल सका, मगर आश्रमों में वहीं अव्यवस्थाएं मिली जिनकी आड़ में बाल तस्करी संभव भी है।
ज्यादातर आश्रमों में बच्चों का कोई पुख्ता व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं है, जिससे पता चल सके कि आश्रम में बच्चे कब आए और कब कहां गए? इसके अलावा आश्रमों में साफ-सफाई का स्तर बेहद खराब मिला, कई आश्रमों में लड़के और लड़कियां एक ही कमरे में रहते मिले। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बाल आश्रमों में बच्चों को रखने, साफ-सफाई और खान-पान के मानक तय कर रखे हैं, जो कि जांच के दौरान किसी भी बाल आश्रम में नहीं मिले। टीम ने सरकारी नारी निकेतन और शिशु निकेतन की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।
सीएफआई की टीम ने यहां तीन दिनों तक रहकर गोपनीय तरीके से जांच रिपोर्ट तैयार की है। टीम ने निरीक्षण में स्थानीय अधिकारियों के सहयोग लिया, मगर टीम की ओर से आश्रम संचालकों से सवाल कर जो फार्म भरे जा रहे हैं, वो यहां स्थानीय अधिकारियों तक को नहीं दिखाए गए। कुछ आश्रम संचालकों ने टीम से निरीक्षण में सहयोग नहीं किया। कई बार फोन करने के बाद भी न तो वह खुद मिले और न ही कोई कागज टीम को दिया। निरीक्षण में सबसे बड़ी खामी यह मिली कि ज्यादातर आश्रमों का पंजीकरण ही नहीं है।
आश्रमों का पंजीकरण न होने पर टीम के एक सदस्य का कहना था कि दाल में कुछ तो काला है, वे इस निरीक्षण के बारे में बताकर आते तो शायद यहां के कुछ आश्रम रातों-रात गायब हो जाते। खैर, टीम ने संचालकों को जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कराने के दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बच्चों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सुविधाएं दिए जाने को भी कहा गया है। निरीक्षण और जांच सबंधी सवालों पर टीम के सदस्यों ने कुछ भी बताने से फिलहाल मना कर दिया। उनका कहना था कि यह एक गोपनीय निरीक्षण है और इसके बारे में अभी कुछ नहीं बताया जा सकता है।
टीम को पूरा सहयोग कर दून, विकासनगर के सभी आश्रमों का निरीक्षण करा दिया गया है। टीम की ओर से शिशु निकेतन यहां तक कि नारी निकेतन का भी निरीक्षण किया गया। जल्द से जल्द सभी आश्रमों का रजिस्ट्रेशन होगा, ताकि कम से कम हमारे पास सभी आश्रमों की सूची तो हो। इसके साथ ही इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करवाना सुनिश्चित किया जाएगा। टीम ने बच्चों की तस्करी संबंधी कोई सवाल नहीं किया है, यदि उन्हें ऐसी कोई शिकायत मिली है तो यहां शेयर करते ताकि हम अपने स्तर से जांच करा सकते।
- मीना बिष्ट, जिला प्रोबेशन अधिकारी
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन
हर चार बच्चों पर एक आया होनी चाहिए
लड़के-लड़कियों और बुजुर्गों को अलग-अलग रखा जाना चाहिए
प्रॉपर डाइट होनी चाहिए, खाने में पर्याप्त न्यूट्रीशियन होने चाहिए
आश्रम में साफ-सफाई होनी चाहिए
बच्चों के स्कूल जाने के लिए यातायात व्यवस्था होनी चाहिए
बच्चों पर संचालक कभी हाथ न उठाएं