जीत के लिए उत्साहित दिख रही भाजपा को विगत विधानसभा चुनावों के परिणामों से सबक लेकर आगे बढ़ना होगा। नहीं तो जिस तरह विगत चुनावों में रुड़की में भाजपा की लुटिया डूबी थी इसी तरह इस बार चुनाव परिणाम बाजी पलट सकते हैं।
विगत चुनावों में जहां भाजपा संगठन के हिसाब से निर्धारित हरिद्वार जिले में सभी सीटों पर विजय हासिल की थी। वहीं रुड़की जिले में खाता भी नहीं खोल पाई थी।
एक ही जिले में प्रदर्शन में अंतर
विगत विधानसभा चुनावों में एक ही जिले के दो भागों में भाजपा के प्रदर्शन में जमीन-आसमान का अंतर था। जिले के हरिद्वार क्षेत्र में जहां पार्टी को सौ प्रतिशत सीटें मिली थी, वहीं रुड़की जिले में प्रदर्शन शून्य रहा।
भाजपा ने हरिद्वार क्षेत्र के पांचों सीटों पर तो फतह हासिल कर ली थी लेकिन रुड़की जिले में आते-आते एक भी सीट नहीं जीत पाई।
दो भागों में बांटा है जिला
संगठन की दृष्टि से भाजपा ने जिले को दो भागों में बांट रखा है। हरिद्वार जिले में हरिद्वार नगर, हरिद्वार ग्रामीण, रानीपुर, ज्वालापुर और लक्सर विधानसभा क्षेत्र हैं जबकि रुड़की जिले में रुड़की, मंगलौर, खानपुर, झबरेड़ा, भगवानपुर और पिरान कलियर विधानसभा क्षेत्र आते हैं।
संगठन के हरिद्वार जिले में आश्चर्यजनक रूप से सभी पांच सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया। पहले यहां महज एक हरिद्वार शहर सीट पर भाजपा का कब्जा था। यहां पर पार्टी एक सीट से बढ़कर पांच पर जा पहुंची।
रुड़की में लचर प्रदर्शन
वहीं दूसरी ओर रुड़की क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन लचर रहा है। रुड़की शहर सीट पर सुरेशचंद जैन दो बार से विधायक बनते आ रहे थे। इस बार भाजपा ने यह सीट तो गंवाई ही आसपास की सीटों पर भी कमजोर प्रदर्शन रहा।
रुड़की को छोड़कर क्षेत्र की किसी भी सीट पर भाजपा मुख्य मुकाबले में ही नहीं आ पाई। मंगलौर, भगवानपुर, पिरान कलियर, खानपुर और झबरेड़ा में पार्टी उम्मीदवार रनरअप तक नहीं बन पाए।