विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा विभिन्न विधानसभाओं से न्यूनतम तीन दावेदार तय कर चुकी है, जिससे ताल ठोक रहे नेताओं की बेचैनी बढ़ने लगी है। अब देखना यह है कि किसके हाथ टिकट लगती है।
पार्टी सूत्रों की माने तो इस बार पार्टी उम्र सीमा के आधार पर, क्षेत्र में गिरते ग्राफ वाले और दागियों के टिकट काटेगी। यह भी तय है हो चुका है कि सभी बागियों को टिकट नहीं मिलेगा। नए फार्मेट में एक दर्जन नए चेहरों को मौका मिल सकता है। टिकट नहीं मिलने से उठने वाले विरोधी सुरों को शांत करने के लिए एक दौर की बैठक हो भी चुकी है।
भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में विधायकों, नए चेहरों और कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व विधायकों के लिए अलग अलग मानक तय किये गए थे। विधायकों के पांच वर्ष के कामकाज के साथ उनकी सदन में भूमिका, क्षेत्र में सक्रियता सहित लोकसभा चुनाव और उपचुनावों में भूमिका को अहम माना गया है। इसके साथ ही उम्र सीमा के मानक में भी कुछ विधायकों के टिकट कटेंगे।
कांग्रेस से भाजपा में आए दस विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2012 चुनाव में भाजपा से जीत का अंतर, भाजपा प्रत्याशी के अर्जित वोट, उनकी क्षेत्र में छवि सहित कई मानक बनाए गए थे। इसमें कुछ की स्थिति बेहद कमजोर दिखी है। इसके अलावा नए चेहरों को आगे लाने के लिए गैर भाजपा विधायकों वाली 35 सीटों के लिए टटोला गया है।
आंतरिक सर्वेक्षण के अलावा संगठन सहमंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने हर विधानसभा में दावेदारों की ग्रेडिंग कर रिपोर्ट सौंपी है। इसके साथ सांसदों से उनके लोकसभा क्षेत्र में आने वाली 14 विधानसभा सीटों पर रिपोर्ट मांगी गई है। इन सभी रिपोर्टों पर मंथन हो चुका है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विधायकों और दावेदारों के कामकाज पर अपनी रिपोर्ट भी है।