ग्रेस के आधे खुले और आधे बंद पत्तों की खड़खड़ाहट से भाजपा खेमे में बेचैनी है। भाजपा को सप्ताह भर पहले तक कांग्रेस के बेहद कमजोर प्रत्याशियों को लेकर जो खुशफहमी थी वह धीरे धीरे कम हो रही है।
चुनावी बाजार में जिस तरह की चर्चाएं हैं उनसे लगता है कि भाजपा को भी अपनी रणनीति बदलने पर विचार करना होगा। वर्ना गफ़लत में कुछ भी हो सकता है।
भाजपा के भीतर का माहौल बदला
खासतौर पर टिहरी, पौड़ी व हरिद्वार से भाजपा को उम्मीद बंधी थी कि कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार नहीं होंगे। लेकिन अब ना जाने क्यूं भाजपा के भीतर का माहौल बदलने लगा है।
पौड़ी संसदीय सीट से जबसे कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का नाम आए आया है तब से भाजपा के रणनीतिकार खुद भी मुकाबले को गंभीर मानने लगे हैं। क्योंकि यह बात तो सब जानते है कि हरक सिंह हल्का चुनाव नहीं लड़ेंगे।
दूसरी तरफ यही स्थिति हरिद्वार संसदीय सीट पर भी है। कांग्रेस के अब हैवीवेट प्रत्याशी के उतारे जाने की बात हो रही है। यदि बहुत भारी भरकम प्रत्याशी उतारा गया तो मुकाबला यहां भी कांटे का होगा। वैसे भी यदि हरीश रावत के परिवार से प्रत्याशी बनाया तो भी मुकाबला दिलचस्प होना तय है।
हरिद्वार सीट किसी भी हालत में जबरदस्त मुकाबले वाली सीट रहेगी। टिहरी में भी स्थिति तो मुकाबले वाली ही रहेगी। अब देखना यही है कि कांग्रेस के निर्णय के बाद भाजपा अपनी रणनीति को बदलते हुए क्या रुख अख्तियार करती है। बदले हालात में भाजपा के वे सब रणनीतिकार भी मान रहे हैं कि रणनीति में कुछ बदलाव करना लाजिमी है। क्योंकि हर रोज परिस्थितियां बदल रही है।