सीमा पर चीन लगातार घुसपैठ की कोशिश कर रहा है, वहीं अब बॉर्डर पर एक और बड़ी समस्या ने सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें और बढ़ा दी हैं।
भारत चीन सीमा पर लगातार चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वहीं अब उत्तराखंड के चाइना बॉर्डर से लगे मालपा सहित सात गांवों का संपर्क पूरी तरह से धारचूला और अन्य क्षेत्रों से कटा हुआ है। बता दें कि विगत 13 अगस्त को यहां प्रकृति ने रौद्र रूप दिखाया था। जिस कारण यहां जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया।
चीन के साथ खराब होते रिश्तों की अनुगूंज भी ब्यास घाटी में है। सीमा क्षेत्र होने के कारण यहां सड़क निर्माण मुख्य गतिविधि दिखाई देती है। काली नदी के किनारे-किनारे बना कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग जगह-जगह टूटा हुआ है। माना जा रहा है कि ये रास्ता अब शायद बीस दिन बाद तक ही बन पाए। जब तक यह रास्ता नहीं बनता, तब तक शायद इस ब्यास घाटी में यही खोजा जाता रहेगा कि किसका शव मिला और किसका नहीं? जिनका पता नहीं है, उनकी संख्या 30-32 है या 60-70, इसके बाद शायद यह इलाका ढर्रे पर लौटे, एक और आपदा सहने के लिए।
1998 में भी आपदा की चपेट में आए थे मांगती और मालपा
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घाटी में काली नदी अपने रौद्र रूप में दिखाई देती है। सीमा के लिए क्षत-विक्षत, आधी-अधूरी सड़क है और जगह-जगह घाटी के गहरे जख्म दिखाई पड़ते हैं, जिसका दर्द आसपास मौजूद लोगों के चेहरे पर साफ पढ़ा जा सकता है।
सिमाखोला नाला अपने वेग से लापता लोगों की खोज करते सेना के जवानों के साथ स्थानीय और प्रशासन के लोगों को डरा रहा है।
1998 में भी मांगती और मालपा आपदा की चपेट में आए थे। इसके बाद भी कई बार यह इलाका कुदरत की मार का शिकार हुआ, जिसके कई घाव घाटी ने झेले हैं। 13 अगस्त की देर रात को हुआ हादसा भी 1998 की पुनरावृत्ति है।
स्थानीय लोगों की माने तो आपदा जैसे ब्यास घाटी की नियति हो गई है।
सेना के छह जवान अब भी लापता
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कैलाश मानसरोवर यात्रा के कारण चहल-पहल में रहने वाली घाटी में हर किसी के जेहन में एक ही सवाल गूंज रहा है मालपा में क्या हुआ?
धारचूला से आगे बढ़ने पर पहले मांगती है, यहां सिमखोला नाले पर बादल फटने के बाद तबाही मची। बुधवार को यहां पुल पर से मलबा कुछ हद तक साफ कर लिया गया था। लेकिन, गाड़ियां अभी यहां से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
मांगती में केवल एक स्थानीय महिला का ही शव मिला है, सेना के छह जवान अब भी लापता हैं। इनकी खोजबीन में लगे सेना के जवानों के चेहरे भींचे हुए हैं। यहां से आगे बढ़ने पर ही गर्बाधार, लखनपुर आदि स्थानों से होते हुए नजंग तक ही मालपा की ओर बढ़ना संभव हो पा रहा है। नजंग भी मालपा से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है।
13 अगस्त की देर रात को बह गया था पुल
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नजंग में लोक निर्माण विभाग ने कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर काली में मिलने वाले एक नाले पर पुल बनाया था। यह पुल 13 अगस्त की देर रात को बह गया था।
इससे थोड़ा आगे बढ़ें तो एक खड़ी चट्टान पर करीब 30 मीटर का झूला पुल था। यह पुल भी बह गया और इस कारण अब यहां से आगे जाना संभव नहीं हो पा रहा है।
एनडीआरएफ भी इसी जगह से वापस लौटी। नेटवर्क इस इलाके में है नहीं। लोग नेपाल के सिम के जरिये बात करते हैं। सड़क कठोर चट्टान का सीना चाक कर बनाई जा रही है। विस्फोटकों का प्रयोग तो जैसे सामान्य सी बात है। हाल यह है कि मंगलवार को भी एक संपर्क मार्ग बनाने के लिए विस्फोट किया गया। अधबनी सड़क पर हर जगह विस्फोट के लिए ड्रिल किए गए छेद देखे जा सकते हैं। ऐसा लगता है जैसे इस घाटी को विकास और कुदरत दोनों ने ही निशाने पर लिया हुआ है।