इसे भाजपा की धुर विरोधी कांग्रेस भी स्वीकार करती है कि उत्तराखंड के अस्तित्व से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम अलग नहीं किया जा सकता।
जब उत्तरांचल बना था तो अटल बिहारी वाजपेयी ही प्रधानमंत्री थे। उस समय के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार के मुखिया की दूरदृष्टि के अब कई राजनीतिक विश्लेषक कायल हैं।
कारण झारखंड और छत्तीसगढ़ से अलग उत्तराखंड राज्य का आंदोलन बेहद शांतिपूर्ण था। पर इस बात से भी इनकार नहीं किया जा रहा है कि राज्य गठन में थोड़ी और देरी से इस आंदोलन के स्वरूप को बदल भी सकता था।
राजनीतिकि विश्लेषकों की माने तो उत्तराखंड को राज्य का दर्जा देने में पहल सीपीआई की रही पर यह बाद में मुख्य रूप से यूकेडी और भाजपा केएजेंडे में भी उभर आया था।
नब्बे के दशक का विमर्श कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश के इस हिस्से को केंद्र शासित घोषित करने से लेकर हिल काउंसिल तक का था।