नव वर्ष में राहु, केतु और शनि राशि बदल करेंगे। धरती पर मौजूद जीवन क्रूर ग्रहों के प्रभाव से विचलित होगा।
साढ़े सती प्रारंभ
डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के ज्योतिषीय गणना बताती है कि वृश्चिक राशि के नरेंद्र मोदी पर साढ़े सती प्रारंभ हो चुकी है। नवंबर में जब शनि वृश्चिक में आ जाएंगे तब मोदी की दिनचर्या पर अधिक प्रभाव डालेंगे।
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इस वर्ष 12 जुलाई को राहु राशि बदलकर कन्या तथा केतु मीन राशि में प्रविष्ट होंगे। राहु जब भी कन्या राशि में आए हैं, देश में महंगाई बढ़ी है। 2 नवंबर को शनि देव वृश्चिक राशि में प्रविष्ट हो जाएंगे।
साढ़े सती में रहते हुए ये भी बने प्रधानमंत्री
इस दिन से कन्या राशि पर शनि की साढ़े सती भी समाप्त होगी। यह विचित्र संयोग भी है कि पं. नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी शनि की साढ़े सती में रहते हुए ही प्रधानमंत्री बने।
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शुभ ग्रहों की अपेक्षा क्रूर ग्रहों का प्रभाव अधिक पड़ता है। शुभकारी शुभ ग्रह शीघ्र समाप्त हो जाते हैं, जबकि क्रूर ग्रह धीरे-धीरे यात्रा करते हैं। राहु और केतु को भारतीय ज्योतिष तंत्र में क्रूर ग्रहों की संज्ञा में रखा है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार ये दोनों ग्रह न केवल जन्म और मृत्यु के लिए जिम्मेवार है अपितु जन्म-मरण के चक्कर में भी ये ही ग्रह डालते हैं। जब भी इन ग्रहों की राशि अथवा चाल में परिवर्तन आता है, धरती पर प्रभाव पड़ता है।
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डॉ. मिश्रपुरी का दावा है कि राहु-केतु का राशि बदल महंगाई और पैट्रोल के दाम बढ़ाएगा। दूसरी ओर, बाजार के लिए सुखद संकेत मिलने लगेंगे।