घटना में उनकी रीढ़ की हड्डियां टूट गईं और पांव अभी तक काम नहीं कर रहे हैं। इस समय गरिमा का दिल्ली स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार चल रहा है। वह व्हील चेयर के सहारे हैं, लेकिन खेल के प्रति उनका जज्बा बरकरार है।
दिल्ली में तीन बार व्हील मैराथन दौड़ वह जीत चुकी हैं। पिता पूरन जोशी ने बताया कि इसी जज्बे को देखते हुए उन्हें अब राष्ट्रीय पुरस्कार शान-ए-हिंद पुरस्कार से नवाजा गया है। पिता पूरन जोशी ने बताया माता आशा जोशी भी कैंसर रोग से जूझ रही हैं। उनका सफदरजंग में अस्पताल में उपचार चल रहा है।