वायुसेना में दून के दो युवाओं ने अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है। एक ओर दून के कुणाल वर्मा को सर्वोच्च स्वॉर्ड ऑफ ऑनर सम्मान से नवाजा गया है तो वहीं, दून की बेटी नेहा मेलकानी भी इसी पीओपी से पासआउट होकर वायुसेना में अफसर बन गई हैं।
दून के कुणाल वर्मा को बंगलूरू स्थित वायुसेना तकनीकी कॉलेज, जालहल्ली की पासिंग आउट परेड में सर्वोच्च स्वॉर्ड ऑफ ऑनर सम्मान से नवाजा गया है तो वहीं, दून की बेटी नेहा मेलकानी भी इसी पीओपी से पासआउट होकर वायुसेना में अफसर बन गई हैं।
देहरादून के खुड़बुड़ा निवासी संजीव वर्मा के इकलौते बेटे कुणाल वर्मा ने इंजीनियरिंग के बाद वायुसेना की राह चुनी। फ्लाइंग ऑफिसर कुणाल का कहना है कि कैंट क्षेत्र स्थित कैंब्रियन हॉल से पढ़ाई के दौरान सेना के अधिकारियों को देखने से उनके भीतर सेना में जाने का जज्बा जगा।
इसके बाद वह पढ़ाई पूरी करने तक प्रयासरत रहे, लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) से इंजीनियरिंग के बाद उन्हें वायुसेना में जाने का मौका मिला।
कुणाल को वायुसेना तकनीकी कॉलेज, जालहल्ली की पासिंग आउट परेड में सर्वश्रेष्ठ स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया है। वहीं, दून में टर्नर रोड निवासी ऑनरेरी लेफ्टिनेंट नारदानंद मेलकानी (रिट.) की बेटी नेहा मेलकानी ने परिवार की सैन्य परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए वायुसेना में अफसर बनने का सफर तय किया।
खास बात यह है कि उन्होंने दो बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नौकरी छोड़कर वायुसेना की राह चुनी। अपने गांव सेलालेख, पहाड़पानी, नैनीताल से सेना में अफसर बनने वाली नेहा पहली बेटी हैं।