जैव विविधता संरक्षण की दिशा में चार दशक तक काम करने वाले वृक्षमित्र स्व. कुंवर दामोदर राठौर के अधूरे कामों को आगे बढ़ाने का बीड़ा अब उनकी बेटी प्रियंका उठाने वाली है। भनड़ा शांतिकुंज जंगल में स्व. राठौर ने न केवल जैव विविधता संरक्षण का अभियान चलाया वरन लोगों को भी इसके लिए प्रेरित भी किया था।
कुंवर दामोदर राठौर की अल्प बीमारी के बाद आठ जून 2016 को पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। 1926 में डीडीहाट के भनड़ा गांव में जन्मे कुंवर दामोदर ने 1975 तक ग्राम विकास अधिकारी के पद पर नौकरी की। उसके बाद वह पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण के काम में जुट गए। उनको अतुलनीय कामों के बदौलत वर्ष 2000 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने वृक्षमित्र पुरस्कार दिया था।
उनके निधन के बाद लगातार यह सवाल उठते रहे कि आखिर उनके कामों को कौन आगे बढ़ाएगा और शांतिकुंज में लगाए गए असंख्य पौधों की रक्षा कौन करेगा। कुंवर दामोदर की बेटी प्रियंका ने बताया कि वह अपनी मां और पति के साथ मिलकर पिता के काम को आगे बढ़ाएंगी। पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर वृहद पौधरोपण कार्यक्रम होगा।
अमर उजाला से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि उनके पिता पेड़ों और वनस्पति को ही अपना सबकुछ मानने लगे थे। वह कहते थे कि हमें इस दुनिया में जीने के लिए अगर सबसे महत्वपूर्ण चीज कोई देता है तो वह यह पेड़ हैं। प्रियंका ने बताया कि पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर पिथौरागढ़ में वृहद कार्यक्रम होगा। उसके बाद छह जून से लगातार तीन दिन तक डीडीहाट में पौधरोपण के कार्यक्रम चलेंगे।
वह अपने पिता के काम को इसी अभियान के साथ आगे बढ़ाएंगी। कुंवर दामोदर राठौर द्वारा पैतृक आवास शांतिकुंज भनड़ा (खोड़) में लगाई गई नर्सरी की देखभाल कर रही उनकी पत्नी द्रोपदी राठौर ने कहा कि इस नर्सरी के पौधों को कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग और स्कूल परिसरों में लगाया जाएगा। 28 वर्षीय प्रियंका के दो बेटे हैं। पति हरीश सिंह राजकीय इंटर कॉलेज चौबाटी में शिक्षक हैं। जब तक प्रियंका की शादी नहीं हुई थी तब तक वह पिता के साथ ही पेड़, पौधों की देखभाल करती थी। प्रियंका का बचपन शांतिकुंज के जंगलों में बीता।