इंसान अगर कुछ करने की ठान ले तो हैसियत की हथकड़ी भी खुल जाती है। उत्तराखंड के राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बड़कोट में तैनात रात्रि चौकीदार और उनकी पत्नी ने 16 सालों में कालेज परिसर की अनुपयोगी जमीन पर ऐसा बगीचा तैयार कर दिखाया जो लोगों के लिए मिसाल बन गया है।
एक हजार से अधिक फलदार वृक्ष
दान में दी गई 135 नाली जमीन पर बने इस इंटर कॉलेज परिसर में एक हजार से अधिक फलदार, सजावटी एवं चारा प्रजाति के वृक्ष हैं।
पुरोला से 1998 में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बड़कोट में स्थानांतरित होकर आए रात्रि चौकीदार गजेंद्र असवाल एवं उनकी पत्नी सुशीला ने बंजर पड़े परिसर की जमीन के साथ ही पास के साड़ा गांव की चरान-चुगान वाली 40 नाली खाली जमीन को हरा भरा करने का बीड़ा उठाया।
रात में वे अपनी ड्यूटी करते और दिन में वह पत्नी के साथ बगीचा तैयार करते। अपने सीमित संसाधनों से उन्होंने आडू, अमरूद, खुमानी, अनार, तेजपत्ता, बांज, गुरियाल, नीम, भीमल आदि वृक्षों को तैयार कर दिखाया। गजेंद्र के इस प्रयास से विद्यालय की बंजर जमीन अतिक्रमण से भी बच गई।
सीढ़ीदार जमीन के इस हरे भरे वन से प्रेरित हो अब अध्यापिकाएं व छात्राएं भी वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित कर उनके प्रयास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
ज्ञान बढ़ाने में उपयोगी
यह उद्यान सैकड़ों छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन का संदेश दे रहा है। पेड़-पौधों के बारे में छात्राओं का ज्ञान बढ़ाने के उद्देश्य से भी यह काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
जिले के दूसरे विद्यालयों में भी जमीन की उपलब्धता को देखते हुए क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग को वहां भी उद्यान विकसित करके छात्र-छात्राओं को पर्यावरण के साथ वनस्पति विज्ञान का ज्ञान बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए।